दैनिक खबरनामा । श्रीनगर, 4 जुलाई: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने जमानत याचिकाओं को लेकर प्रक्रिया कड़ी कर दी है। 2 जुलाई 2026 से अदालत ने एक नया प्रावधान लागू किया है जिसके तहत अब कोई भी आरोपी आधी-अधूरी जानकारी के साथ बेल की अर्जी नहीं लगा सकेगा।
हाईकोर्ट ने जम्मू एवं कश्मीर हाईकोर्ट नियमावली, 1999 में संशोधन करते हुए नया नियम 176-बी जोड़ दिया है। अधिसूचना क्रमांक 1399 of 2026/आरजी पर रजिस्ट्रार जनरल एमके शर्मा ने हस्ताक्षर किए हैं और यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा।
पहले क्या दिक्कत आ रही थी
अदालत का कहना है कि अक्सर जमानत मांगते समय आरोपी अपनी पुरानी FIR, पहले खारिज हो चुकी बेल अर्जियां या भगोड़ा घोषित होने जैसी अहम बातें नहीं बताते थे। इससे जजों के सामने मामले का पूरा पक्ष नहीं पहुंच पाता था और फैसला लेने में मुश्किल आती थी।
अब क्या बताना अनिवार्य होगा
नए नियम के अनुसार हर बेल याचिका के साथ निम्न जानकारी देना जरूरी होगा:
1. मौजूदा केस का विवरण
– FIR का नंबर, तारीख, संबंधित थाना, जिला और राज्य
– लगाई गई धाराएं और उनमें अधिकतम संभावित सजा
– गिरफ्तारी की तारीख और अब तक पुलिस या न्यायिक हिरासत में बिताए गए दिन
– केस की मौजूदा स्थिति: जांच जारी है या चार्जशीट दाखिल हो चुकी, कोर्ट ने संज्ञान लिया या नहीं, आरोप तय हुए या ट्रायल शुरू हुआ
– चार्जशीट में कुल गवाहों की संख्या और अब तक पेश हुए सरकारी गवाहों का ब्यौरा
2. आरोपी का पिछला रिकॉर्ड
– पहले दर्ज हुई FIR की संख्या और उन मामलों की मौजूदा स्थिति
– अतीत में किन-किन अदालतों में जमानत के लिए आवेदन किया गया और क्या आदेश आया
– क्या कभी गैर-जमानती वारंट जारी हुआ या किसी कोर्ट ने भगोड़ा घोषित किया
हाईकोर्ट का मकसद
अदालत का मानना है कि पूरी जानकारी मिलने से जमानत पर निर्णय अधिक पारदर्शी, संतुलित और तथ्यों पर आधारित होगा। इससे सुनवाई में एकरूपता आएगी और जवाबदेही भी बढ़ेगी।
आदेश जारी होने के बाद इसे सभी संबंधित न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारियों को भेज दिया गया है ताकि तुरंत अमल हो सके।
वकीलों के लिए सलाह: अगर आप या आपका कोई परिचित जम्मू, कश्मीर या लद्दाख में जमानत के लिए आवेदन करने जा रहा है, तो याचिका दाखिल करने से पहले वकील के साथ बैठकर ऊपर लिखी सभी जानकारियों की फाइल तैयार कर लें। एक भी बिंदु छूटा तो अर्जी में अड़चन आ सकती है।