प्रशासन के रिकॉर्ड में सिर्फ 441 कंपनियां पंजीकृत, शहर में सैकड़ों अन्य एजेंसियों के संचालन की आशंका
विदेश भेजने के नाम पर बढ़ रही ठगी, अपंजीकृत कंपनियों पर कार्रवाई की मांग तेज
दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 8 जुलाई : विदेश में बेहतर भविष्य और रोजगार के सपने दिखाकर लोगों से लाखों रुपये की ठगी के बढ़ते मामलों के बीच चंडीगढ़ में इमीग्रेशन कंपनियों के संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, चंडीगढ़ प्रशासन के पास केवल 441 इमीग्रेशन कंपनियांही पंजीकृत हैं। इनमें से भी कई कंपनियां अपने पंजीकृत पते से संचालित नहीं हो रही हैं या कार्यालय बंद कर चुकी हैं। इसके बावजूद शहर में बड़ी संख्या में इमीग्रेशन कंपनियों के सक्रिय होने की चर्चा है, जिससे नियामक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
बड़ा नेटवर्क, सीमित निगरानी
जानकारों का कहना है कि चंडीगढ़ उत्तर भारत का प्रमुख इमीग्रेशन हब बन चुका है। यहां से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और अन्य राज्यों के हजारों लोग विदेश जाने के लिए एजेंसियों से संपर्क करते हैं। इसी बढ़ती मांग का फायदा उठाकर कई अपंजीकृत और संदिग्ध एजेंसियां भी बाजार में सक्रिय हो गई हैं।
नौकरी, स्टडी वीजा और वर्क परमिट के नाम पर झांसा
कई एजेंसियां विदेश में नौकरी, स्टडी वीजा, वर्क परमिट और स्थायी निवास (पीआर) दिलाने के नाम पर आकर्षक पैकेज और गारंटी का दावा करती हैं। पीड़ितों का आरोप है कि उनसे लाखों रुपये लेने के बाद या तो वीजा प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती या फिर एजेंसियां संपर्क तोड़ देती हैं। कई मामलों में कार्यालय बंद मिलने और संचालकों के फरार होने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
पंजीकरण की जांच जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन को शहर में संचालित सभी इमीग्रेशन कंपनियों का व्यापक सत्यापन अभियान चलाना चाहिए। जिन कंपनियों का पंजीकरण नहीं है या जो नियमों का उल्लंघन कर रही हैं, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके साथ ही समय-समय पर लाइसेंस का सत्यापन और निरीक्षण भी आवश्यक है।
लोगों को भी बरतनी होगी सावधानी
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश जाने की योजना बना रहे लोगों को किसी भी एजेंसी को भुगतान करने से पहले उसका पंजीकरण, कार्यालय का पता, लाइसेंस और पूर्व रिकॉर्ड अवश्य जांचना चाहिए। केवल आकर्षक विज्ञापनों या सोशल मीडिया प्रचार के आधार पर निर्णय लेना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
विदेश भेजने के नाम पर बढ़ती धोखाधड़ी को रोकना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यदि अपंजीकृत और फर्जी इमीग्रेशन कंपनियों की समय रहते पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है, तो न केवल लोगों की मेहनत की कमाई सुरक्षित रह सकेगी बल्कि चंडीगढ़ में इमीग्रेशन उद्योग की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी।