दैनिक खबरनामा । जम्मू, 10 जुलाई: राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने करीब तीन दशक पुराने एक मामले में शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की। एनआईए ने जम्मू की विशेष अदालत में 1996 में श्रीनगर में हुई हिंसा से जुड़ा आरोपपत्र पेश किया। इस चार्जशीट में हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के 6 वरिष्ठ नेताओं को आरोपी बनाया गया है।
जिन नेताओं के नाम इस सूची में शामिल हैं, वे हैं: शब्बीर अहमद शाह, सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी लोन, मोहम्मद याकूब वानी उर्फ मोहम्मद याकूब वकील, जावेद अहमद मीर और शकील अहमद बख्शी।
किन धाराओं में केस
एजेंसी ने सभी पर रणबीर दंड संहिता 1989 की कई धाराएं लगाई हैं। इनमें आपराधिक साजिश रचना, हत्या का प्रयास, दंगा करना और सरकारी कर्मचारियों पर हमला शामिल है। इसके अलावा गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून 1967 की धारा 13 भी जोड़ी गई है।
3 आरोपी अब नहीं रहे
एनआईए के अधिकारियों के अनुसार सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी लोन और मोहम्मद याकूब वानी का देहांत हो चुका है। कानूनी प्रक्रिया के तहत उनके खिलाफ मुकदमा समाप्त माना जाएगा। बावजूद इसके एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि जांच में मिले सबूतों के आधार पर ये तीनों भी साजिश और गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा थे।
क्या हुआ था 17 जुलाई 1996 को
एनआईए के मुताबिक 17 जुलाई 1996 को श्रीनगर के नाज क्रॉसिंग इलाके में मारे गए आतंकी हिलाल अहमद बेग का जनाजा निकाला गया था। आरोप है कि इस जुलूस का नेतृत्व हुर्रियत के नेताओं ने किया। इसी भीड़ में हथियारबंद आतंकी भी शामिल हो गए थे।
जुलूस के दौरान पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग की गई। साथ ही भारी पत्थरबाजी हुई जिसमें कई पुलिसकर्मी जख्मी हुए और सरकारी वाहनों को क्षति पहुंची।
एजेंसी का कहना है कि जांच में यह भी सामने आया कि नेताओं ने उस दिन भारत विरोधी और पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगवाए। भड़काऊ भाषण देकर सशस्त्र संघर्ष की वकालत की गई। एनआईए ने चार्जशीट में लिखा है कि यह पूरी घटना पहले से तय साजिश का हिस्सा थी। जनाजे को अलगाववादी विचारधारा फैलाने, सरकार के खिलाफ लोगों को उकसाने, माहौल खराब करने और पुलिस पर हमला करवाने के लिए इस्तेमाल किया गया।
मामले की अब तक की टाइमलाइन
17 जुलाई 1996: घटना वाले दिन ही श्रीनगर के शेरगढ़ी थाने में FIR दर्ज हुई थी।
अप्रैल 2026: गृह मंत्रालय के निर्देश पर एनआईए ने जांच अपने हाथ में ली।
केस नंबर: RC-01/2026/NIA/JMU
एनआईए ने बताया कि इस मामले में आगे की जांच अभी जारी है।