दैनिक खबरनामा । चंडीगढ़, 11 जुलाई: पीजीआई का बहुप्रतीक्षित एडवांस्ड न्यूरो साइंसेज सेंटर कागजों पर भले ही आधुनिकता की मिसाल हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। 440 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस छह मंजिला इमारत का उद्घाटन 17 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्चुअल माध्यम से करेंगे, लेकिन अभी से यहां पहुंचने वाले मरीजों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे बड़ी परेशानी है जगह की कमी। नए सेंटर में इलाज कराने आने वाले मरीजों को अंदर जाने से पहले ही मुख्य द्वार के बाहर घंटों खड़ा रहना पड़ रहा है। रोजाना न्यूरोसाइंसेज विभाग में 1000 से 1500 मरीज इलाज के लिए आते हैं। साथ में आने वाले परिजनों को मिलाकर यह संख्या करीब 3000 तक पहुंच जाती है।
सुबह के वक्त यहां 150 से 200 लोगों की कतारें लग रही हैं। बुजुर्ग और गंभीर हालत वाले मरीज भी दो से तीन घंटे तक धूप और भीड़ में खड़े रहने को मजबूर हैं। अंदर प्रवेश भी चरणबद्ध तरीके से दिया जा रहा है। एक बार में केवल 10 से 20 लोगों को ही भीतर भेजा जाता है, जिसके कारण लाइनें और लंबी हो रही हैं।
नई बिल्डिंग, वही पुरानी भीड़
इससे पहले न्यूरो विभाग पीजीआई की न्यू ओपीडी की तीसरी मंजिल पर चलता था। वहां भी मरीजों की भारी भीड़ के चलते असुविधा होती थी। करीब दो महीने पहले पूरे विभाग को इस नए सेंटर में शिफ्ट किया गया था। उम्मीद थी कि नई और बड़ी इमारत में मरीजों को राहत मिलेगी और बैठने की पर्याप्त व्यवस्था होगी, लेकिन स्थिति अब और मुश्किल लग रही है।
पीजीआई की सालाना रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल न्यूरो विभाग की ओपीडी में 90 हजार से ज्यादा मरीज पहुंचे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े मरीज भार को देखते हुए वेटिंग एरिया और आवाजाही की प्लानिंग पहले से बेहतर होनी चाहिए थी।
पीजीआई प्रशासन का पक्ष
पीजीआई के प्रवक्ता ने बताया कि अंदर वेटिंग हॉल की क्षमता भर जाने के कारण अस्थायी तौर पर मरीजों और उनके साथ आए लोगों को ओपीडी ब्लॉक के बाहर रोका जा रहा है। उनका कहना है कि टोकन सिस्टम को ठीक से लागू करने, अंदर अत्यधिक भीड़ रोकने और किसी तरह की अव्यवस्था से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है। जैसे ही अंदर जगह खाली होती है, टोकन के क्रम में लोगों को अंदर भेजा जाता है।
नई इमारत के उद्घाटन से पहले ही सामने आई यह स्थिति मरीजों और उनके परिजनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।