दैनिक खबरनामा। श्रीनगर, 21 जुलाई: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने साफ कर दिया है कि केंद्र से राज्य का दर्जा वापस लेने की मांग को लेकर छेड़ा गया अभियान क्षणिक नहीं है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष ने कहा कि यह एक लंबी सियासी लड़ाई है और पार्टी अपने बुनियादी एजेंडे से पीछे नहीं हटेगी।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार को हुए प्रदर्शन के बाद मंगलवार को श्रीनगर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र को उसके किए वादों की याद लगातार दिलाई जाती रहेगी। उनके अनुसार जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पहले पारित स्वायत्तता प्रस्ताव को जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया गया।
उमर अब्दुल्ला ने कहा, “उस समय यह प्रचारित किया गया कि विधानसभा का प्रस्ताव देश से अलग होने या पड़ोसी मुल्क में शामिल होने की साजिश है। यह पूरी तरह भ्रामक और राजनीतिक मंशा से किया गया दुष्प्रचार था। हमारा मकसद केवल संवैधानिक अधिकारों की बहाली था, जिसे बदनाम करने की कोशिश की गई। हम इस तरह के हर झूठे नैरेटिव को सिरे से नकारते हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि उस प्रस्ताव के बाद केंद्र को बेचैनी हुई और जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक ताकत को कमजोर करने के लिए नए दल और समूह सामने लाए गए। “जनता की आवाज को बांटने की वही पुरानी नीति आज भी अपनाई जा रही है”, उन्होंने कहा।
दिल्ली में प्रदर्शन करने के कारण बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वहां जाकर केंद्र को उसके अपने वादों का आईना दिखाया गया। उन्होंने सभी दलों को एकजुट होने का न्योता भी दिया था।
“राज्य का दर्जा किसी एक दल का मुद्दा नहीं है। यह पूरे जम्मू-कश्मीर के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा सवाल है”, उमर अब्दुल्ला ने कहा।
कुछ क्षेत्रीय दलों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वे न तो इस आंदोलन में शामिल हुए और न ही कोई पहल की। “कुछ लोग हमारे साथ खड़े नहीं हुए। उल्टा इस मुहिम का मजाक उड़ाते रहे। केंद्र क्या सोचता है इसकी मुझे परवाह नहीं, लेकिन तकलीफ उन लोगों से है जो खुद को जम्मू-कश्मीर का शुभचिंतक बताते हैं और निर्णायक मौके पर चुप्पी साध लेते हैं।”
पहले राज्य का दर्जा, फिर बाकी बात
नेशनल कॉन्फ्रेंस पर अनुच्छेद 370 से पीछे हटने के आरोपों को उन्होंने खारिज किया। “लोग पूछते हैं हम 370 की बात क्यों नहीं कर रहे। मेरा सवाल है हमने अपना एजेंडा कब छोड़ा? जब दूसरे दल सत्ता और भाजपा से नजदीकी के लिए अपने उसूलों से समझौता कर रहे थे, तब भी नेशनल कॉन्फ्रेंस अपने स्टैंड पर अडिग थी और आज भी है”, उन्होंने कहा।
उमर अब्दुल्ला के मुताबिक अभी सबसे जरूरी काम जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाना और केंद्र-जम्मू-कश्मीर के बीच संवैधानिक रिश्तों को फिर से स्थापित करना है।
“अगर राज्य ही नहीं बचेगा तो 370 या 371 की बहाली की चर्चा का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। नाम कुछ भी हो, असल मुद्दा शक्तियों के बंटवारे और अधिकारों की वापसी का है। असली संघीय ढांचा तभी बनेगा जब पूर्ण राज्य का दर्जा वापस मिलेगा।”
विपक्ष पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि बहुत से दल भाजपा को नाराज करने के डर से सड़क पर नहीं उतरे। “कुछ लोग घर बैठकर सिर्फ सोशल मीडिया पर बयान देते रहे। जम्मू-कश्मीर की जनता अब समझ रही है कि जमीन पर कौन संघर्ष कर रहा है और कौन स्क्रीन के पीछे से राजनीति कर रहा है।”
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जंतर-मंतर का प्रदर्शन अंत नहीं है। आंदोलन के अगले चरण का ऐलान जल्द होगा और उसकी रूपरेखा पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में तय की जाएगी।