दैनिक खबरनामा। बारामूला, 23 जुलाई: उत्तरी कश्मीर के उड़ी उपमंडल अंतर्गत बिजहामा के मायन गांव में आज शाम अचानक आई प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है। पहाड़ों पर बादल फटने के बाद तेज रफ्तार से आया सैलाब कुछ ही मिनटों में पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम के समय मायन क्षेत्र में अचानक गर्जना के साथ बादल फटा। इसके फौरन बाद पहाड़ों से पानी, बोल्डर और कीचड़ का सैलाब नीचे की ओर उतर आया। इस वजह से इलाके में अचानक बाढ़ जैसी स्थिति और जगह-जगह भूस्खलन हो गया।
सैलाब के साथ बहकर आया मलबा रिहायशी इलाकों और संपर्क मार्गों पर जमा हो गया। कई घरों में पानी घुसने से फर्नीचर, अनाज और कीमती सामान नष्ट हो गया। मुख्य सड़कें जगह-जगह बंद हो गई हैं, जिससे दैनिक जीवन पूरी तरह ठप पड़ गया है।
नेता ने की प्रशासन से फौरी मदद की अपील
अपनी पार्टी के प्रमुख अल्ताफ बुखारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर इस हादसे की जानकारी दी। उन्होंने जिला प्रशासन से तुरंत राहत-बचाव कार्य शुरू करने का आग्रह किया। पीड़ित परिवारों के प्रति दुख जताते हुए उन्होंने कहा कि वह इस मुश्किल घड़ी में उनके साथ खड़े हैं और सभी की सलामती के लिए दुआ कर रहे हैं।
नुकसान का आंकलन जारी, जान-माल की पुष्टि नहीं
अब तक किसी व्यक्ति या मवेशी के हताहत होने की सरकारी पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि शुरुआती जानकारी परेशान करने वाली है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि आपदा में दर्जनों मकान, दुकानें और निजी संपत्तियां क्षतिग्रस्त हुई हैं। इसके अलावा सड़कें, पुलिया और पेयजल पाइपलाइनें भी टूट गई हैं। कई परिवारों का पूरा घर का सामान पानी में बह गया है और वे खुले में रहने को मजबूर हैं।
प्रशासन मौके पर, बचाव कार्य शुरू
सूचना मिलते ही तहसीलदार और संबंधित थाने के एसएचओ अपनी टीमों के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का काम शुरू कर दिया गया है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
गांव वालों ने प्रशासन से अतिरिक्त बचाव दल और राहत सामग्री तुरंत भेजने की मांग की है। उनका कहना है कि फंसे लोगों को निकालने और मदद पहुंचाने की रफ्तार तेज करने की जरूरत है।
पीड़ित परिवारों को इस समय टेंट, कंबल, बर्तन, साफ पीने का पानी, भोजन और रोजमर्रा की जरूरी चीजों की सख्त जरूरत है। जिनके घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, वे बिना छत के खुले आसमान के नीचे रात गुजार रहे हैं।
सबसे बड़ा खतरा: नाला जाम
सबसे गंभीर स्थिति यह है कि मलबे के कारण इलाके का मुख्य नाला पूरी तरह बंद हो गया है। नतीजतन पुलिया के पास पानी जमा हो रहा है। अगर इसे तुरंत नहीं खोला गया तो रुका हुआ पानी आसपास की बस्तियों में भर सकता है और नुकसान और बढ़ सकता है। स्थानीय लोग मौके पर जेसीबी और अर्थ-मूवर मशीनें तैनात करने की मांग कर रहे हैं ताकि नाले की सफाई हो सके।
फिलहाल जिला प्रशासन और ग्रामीण मिलकर राहत कार्यों में जुटे हैं। इस दुखद घटना से प्रभावित हर परिवार के साथ हमारी संवेदनाएं हैं।