दैनिक खबरनामा 25 जुलाई नई दिल्ली: छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर पर 26 दिनों तक आमरण अनशन करने वाले प्रसिद्ध सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक इन दिनों गंभीर शारीरिक कमजोरी के साथ-साथ मानसिक दबाव का भी सामना कर रहे हैं। लंबे उपवास के कारण उनका स्वास्थ्य प्रभावित हुआ है, वहीं सोशल मीडिया पर हो रही आलोचनाओं और उन पर लगाए जा रहे आरोपों ने उन्हें भावनात्मक रूप से भी झकझोर दिया है। खासकर उन लोगों की ओर से उठ रहे सवाल, जिनके हित में उन्होंने आंदोलन किया, उन्हें गहरी पीड़ा पहुंचा रहे हैं।
सरकार के साथ कथित “समझौते” और “डील” के आरोपों के बीच वांगचुक ने अस्पताल के आईसीयू से करीब 30 मिनट का वीडियो जारी कर अपनी बात रखी और इन आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।
28 जून से शुरू किया था आमरण अनशन
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 20 जून को जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू किया था। इस अभियान को उस समय व्यापक समर्थन मिला, जब 28 जून को सोनम वांगचुक छात्रों के समर्थन में आमरण अनशन पर बैठ गए। समय बीतने के साथ इस आंदोलन को देश और विदेश के मीडिया में व्यापक कवरेज मिलने लगी।
18 जुलाई को पुलिस ने उन्हें धरना स्थल से हटाया, जिसके बाद देशभर के युवाओं के बीच उनके समर्थन में माहौल और मजबूत हुआ। अस्पताल ले जाए जाने के बाद भी उन्होंने अपना अनशन जारी रखा। अंततः 26 दिन बाद उन्होंने तब उपवास समाप्त किया, जब सरकार की ओर से लिखित आश्वासन दिया गया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले किसी भी छात्र के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
अनशन समाप्त होने के बाद सोशल मीडिया पर उठे सवाल
अनशन खत्म करने के बाद सोनम वांगचुक को सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं ने उनके स्वास्थ्य लाभ की कामना तो की, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन को लेकर अब उनकी रणनीति अलग होगी। पार्टी का कहना था कि वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से पीछे हटने को तैयार नहीं है।
इसके बाद सोशल मीडिया पर कुछ CJP समर्थकों और अन्य लोगों ने वांगचुक पर सरकार से समझौता करने और कथित गुप्त डील करने जैसे आरोप लगाए। जंतर-मंतर पहुंचकर समर्थन देने वाले आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने बाद में सोशल मीडिया पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी, जबकि राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने आंदोलन के मूल मुद्दों को पीछे छोड़ दिए जाने को लेकर सवाल उठाए। इसी दौरान कई राजनीतिक नेताओं ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से “आई सपोर्ट सोनम वांगचुक” वाली डीपी भी हटा ली।
आईसीयू से वीडियो जारी कर दिया जवाब
लगातार हो रही आलोचनाओं के बीच सोनम वांगचुक ने अस्पताल से वीडियो जारी कर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने बताया कि वह फिलहाल केवल तरल आहार (लिक्विड डाइट) पर हैं और 26 दिनों के अनशन के दौरान उनका 11 किलो वजन कम हो चुका है। उन्होंने कहा कि लंबे उपवास के कारण उनके शरीर के अंदरूनी अंगों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है।
वीडियो में उन्होंने कहा, “यह वीडियो मैं थोड़ा दुख, थोड़ी हैरानी, गम और गुस्से के साथ बना रहा हूं। अपने युवा भाइयों-बहनों और छात्रों के लिए 26 दिन तक भूखा रहने के बाद, जिसमें मेरे शरीर का 11 किलो वजन खत्म हो चुका है और शरीर के अंदरूनी अंग कभी ठीक न होने वाले नुकसान की स्थिति तक पहुंच गए हैं। लद्दाख की कड़ाके की ठंड से लेकर दिल्ली की चिलचिलाती धूप में यह सब करने के बाद क्या अब मुझे किसी से कैरेक्टर सर्टिफिकेट लेना होगा कि मेरा अनशन कितना पवित्र था? मैंने अनशन क्यों तोड़ा, किसके हाथ से तोड़ा और मेरी क्या डील हुई? कल से थोड़ा लिक्विड पी रहा हूं, जिससे शरीर में थोड़ी जान आई तो बदकिस्मती से वह ऊर्जा मुझे इस सफाई को देने में खर्च करनी पड़ रही है।”
आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, “धिक्कार है ऐसे देश पर जहां इस तरह की सोच उत्पन्न होती है और लोगों के मन में ऐसे नीच ख्याल आते हैं।”
पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने भी जताई नाराजगी
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने भी एक भावुक संदेश जारी कर आलोचकों को जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वांगचुक अभी भी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं और अनशन के दौरान उनका 11 किलो वजन तथा शरीर की महत्वपूर्ण मांसपेशियां कम हो चुकी हैं।
उन्होंने कहा, “उन्होंने अपने आराम से ऊपर उठकर युवाओं के लिए बलिदान को चुना। कम से कम हम उनसे राजनीतिक अपेक्षाएं जोड़ने से पहले एक दिन की मानवीय संवेदना तो दिखा सकते थे। देश और समाज की निस्वार्थ सेवा करने वाले व्यक्ति का आकलन करने से पहले हर किसी को अपने भीतर उतना ही नैतिक साहस विकसित करना चाहिए। कृपया अपने अंदर थोड़ा इंसानियत और दिल रखिए।”