दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 27 जुलाई: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने सरकार को प्रदर्शनकारियों और आंदोलन के आयोजकों पर दर्ज आपराधिक केस वापस लेने के लिए 24 घंटे का समय दिया है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर मांग नहीं मानी गई तो वह फिर से सड़कों पर उतरकर आंदोलन शुरू करेगी।
सीजेपी ने कहा कि जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले धरने के समापन से पहले सरकार के साथ तीसरे चरण की वार्ता में इस मुद्दे पर विस्तार से बातचीत हुई थी। उस बैठक में यह सहमति बनी थी कि पूरे देश में प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस ली जाएंगी। इसके साथ ही आगे से किसी भी प्रदर्शनकारी या आयोजक के खिलाफ नया मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा।
सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सपा के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि इस संबंध में केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को एक ड्राफ्ट समझौता पहले ही सौंपा जा चुका है। तय हुआ था कि कानूनी राय लेने के बाद सरकार मंगलवार तक लिखित रूप में समझौता भेजेगी।
रांका ने कहा कि हमें भरोसा है कि केंद्रीय मंत्री अपने वादे पर कायम रहेंगे और किसी प्रदर्शनकारी के साथ गलत व्यवहार नहीं होगा। उन्होंने चेताया कि अगर मंगलवार तक लिखित समझौता नहीं मिला और गिरफ्तार लोगों को रिहा नहीं किया गया, तो पार्टी दोबारा आंदोलन का ऐलान करेगी।
रांका ने बताया कि इस युवा आंदोलन को कानूनी दिक्कतों से बचाने के लिए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से लगातार मार्गदर्शन लिया जा रहा है। सीजेपी के दूसरे प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि संगठन को पहले से ही डर था कि आंदोलन खत्म होने के बाद शामिल लोगों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जाएगा।
कपिल सिब्बल ने प्रेस को बताया कि उन्होंने सीजेपी के छात्रों को मुफ्त कानूनी सहायता देने का फैसला किया है। देश में जहां-जहां छात्रों पर केस दर्ज होंगे, वहां कानूनी मदद मुहैया कराई जाएगी। इसके लिए एक विशेष कानूनी वेबसाइट भी तैयार की जाएगी। सिब्बल ने इस कानूनी लड़ाई के लिए अपनी तरफ से 1 करोड़ रुपये देने की घोषणा की और आम लोगों से भी आर्थिक मदद की अपील की।
सिब्बल ने आशंका जताई कि दिल्ली पुलिस फेशियल रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों की पहचान कर उन्हें टारगेट कर सकती है। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण को सांप्रदायिक रूप देने की कोशिश भी हो सकती है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि आंदोलन से जुड़े छात्रों को किसी भी तरह परेशान या लक्षित न किया जाए।