दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 29 जुलाई: चंडीगढ़ प्रशासन किरायेदारों और मकान मालिकों को बड़ी राहत देने जा रहा है। अब रेंट एग्रीमेंट के लिए वकील और कोर्ट के चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी। प्रशासन बहुत जल्द एक ऑनलाइन टेनेंसी पोर्टल शुरू करने वाला है, जिसके जरिए लोग घर बैठे ही किरायेदारी का पूरा काम निपटा सकेंगे।
मंगलवार को जिला उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने इस पोर्टल की तैयारियों की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने एनआईसी के अधिकारियों को निर्देश दिए कि पोर्टल को आम आदमी के लिहाज से बेहद आसान, सुरक्षित और स्थानीय भाषा में बनाया जाए ताकि हर वर्ग इसे बिना दिक्कत इस्तेमाल कर सके।
पोर्टल पर मिलेंगी ये सुविधाएं
एनआईसी के अधिकारियों के अनुसार http://serviceonline.gov.in वेबसाइट के माध्यम से शहरवासी कई काम कर सकेंगे। इसमें किरायेदारी समझौते का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी यूआईएन लेना, किराये में बदलाव के लिए आवेदन देना और किरायेदारी से जुड़ी शिकायतों का ऑनलाइन निपटारा शामिल है।
30 दिन में मांगे सुझाव
प्रशासन ने “चंडीगढ़ टेनेंसी रूल्स-2026” का ड्राफ्ट सार्वजनिक कर दिया है। आम जनता, मकान मालिकों, किरायेदारों और अन्य जुड़े लोगों से इन नियमों पर 30 दिन के अंदर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। इन्हें एस्टेट ऑफिस में जमा कराया जा सकता है। ये नियम असम टेनेंसी एक्ट-2021 की धारा 44 के तहत बनाए गए हैं और इन्हें चंडीगढ़ में लागू किया जाएगा।
नए नियमों की अहम बातें
– दो महीने में जानकारी देना जरूरी: किसी भी नए किरायेदारी समझौते की जानकारी दो महीने के भीतर ऑनलाइन तहसीलदार को देनी होगी।
– 7 दिन में यूआईएन: रजिस्ट्रेशन के बाद सात दिन के अंदर यूआईएन जारी होगा। इससे मकान मालिक और किरायेदार दोनों के पास समझौते का कानूनी रिकॉर्ड रहेगा।
– स्थानीय भाषा और ओटीपी सुरक्षा: पूरा पोर्टल स्थानीय भाषा में उपलब्ध होगा। हर ऑनलाइन आवेदन के लिए ओटीपी से वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा ताकि फर्जी एंट्री रोकी जा सके और डेटा सिर्फ संबंधित लोगों और अधिकृत अफसरों तक ही सीमित रहे।
– तहसीलदार तय करेंगे किराया: तहसीलदार को किराया तय करने और उसमें बदलाव करने का अधिकार होगा। अगर विवाद होता है तो मामला सरकार से मान्यता प्राप्त वैल्यूअर को भेजा जाएगा।
अगर मकान मालिक किराया लेने से मना करे तो किरायेदार तहसीलदार के पास किराया जमा करवा सकेगा। इससे उसे बेदखली और उत्पीड़न से बचाव मिलेगा।
– कब्जा वापस लेने की प्रक्रिया: मकान मालिक या उसके कानूनी वारिस किरायेदार से मकान खाली करवाने के लिए अतिरिक्त उपायुक्त यानी एडीसी के पास अर्जी दे सकेंगे। आदेश लागू करवाने के लिए एडीसी जरूरत पड़ने पर अधिकारियों या वकीलों की नियुक्ति भी कर सकेंगे।
– समय पर निपटारा: नियमों में विवादों के त्वरित समाधान का प्रावधान है। जवाब देने के लिए 15 से 30 दिन का समय मिलेगा। ट्रिब्यूनल में दायर अपीलों का फैसला 120 दिन में करना होगा। बकाया या रिफंड की राशि पर ब्याज एसबीआई की एमसीएलआर दर + 2 फीसदी के हिसाब से लगेगा।
– सुनवाई में पेशी: पक्षकार खुद, अपने अधिकृत प्रतिनिधि या वकील के जरिए सुनवाई में शामिल हो सकेंगे।
प्रशासन का कहना है कि इस नई डिजिटल व्यवस्था से शहर में किराए के मकानों का पूरा ब्योरा ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएगा। इससे दोनों पक्षों के अधिकार सुरक्षित होंगे, झगड़े जल्दी निपटेंगे और सिविल अदालतों पर मुकदमों का दबाव भी कम होगा।