दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 4 अगस्त: अब यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस यानी UPI के जरिए पेमेंट स्वीकार करने वाले दुकानदारों और कारोबारियों को एक तय रकम के बाद बैंक को मामूली फीस देनी पड़ सकती है। सरकार ने इसी मकसद से मंगलवार को लोकसभा में टैक्स कानूनों में बदलाव वाला बिल पेश किया।
वित्त मंत्रालय की ओर से लाए गए इस प्रस्ताव में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट 2007 में संशोधन मांगा गया है। मौजूदा कानून के तहत बैंक और पेमेंट कंपनियां UPI ट्रांजेक्शन पर किसी से भी कोई चार्ज नहीं ले सकती थीं। नए बदलाव के बाद UPI और RuPay कार्ड के भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने का कानूनी आधार तैयार हो जाएगा।
ग्राहक की जेब पर असर नहीं
मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार इस संभावित शुल्क का बोझ सीधे ग्राहक पर नहीं पड़ेगा। यानी अगर कोई व्यक्ति 3000 रुपये का सामान खरीदता है तो उसे बिल की पूरी रकम ही देनी होगी, अतिरिक्त पैसा नहीं।
इस पूरे मामले में नियम तय करने की जिम्मेदारी नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यानी NPCI को दी जाएगी। NPCI ही बताएगी कि शुल्क कितना होगा और किस सीमा से लागू होगा।
सूत्रों का कहना है कि शुरुआती योजना के मुताबिक 2000 रुपये से ऊपर के UPI भुगतान पर ही यह फीस लग सकती है। दर 0.2 प्रतिशत से 0.3 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है।
बड़े कारोबारियों के लिए नई छूट
बिल में एक और प्रावधान जोड़ा गया है। इसके तहत 50 करोड़ रुपये से ज्यादा सालाना कारोबार करने वाले व्यापारी भी BHIM UPI QR कोड और RuPay कार्ड से भुगतान ले सकेंगे। इस सीमा को अंतिम रूप भी NPCI ही देगा।
फिलहाल डेबिट और क्रेडिट कार्ड से पेमेंट होने पर व्यापारी को बैंक को कुल रकम का एक छोटा हिस्सा शुल्क के रूप में देना होता है। संशोधन पास होने के बाद UPI के लिए भी ठीक वैसा ही मॉडल एक तय सीमा के बाद लागू किया जा सकता है।
बिल में हालांकि यह साफ नहीं किया गया है कि वह सीमा और शुल्क की सटीक दर क्या होगी। NPCI के दिशा-निर्देश आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।