दैनिक खबरनामा 5 अगस्त नई दिल्ली : वित्त मंत्रालय द्वारा संसद में ‘भुगतान और निपटान प्रणाली (संशोधन) विधेयक, 2027’ पेश किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि ₹2000 से अधिक के यूपीआई (UPI) भुगतान पर अब उपभोक्ताओं से शुल्क वसूला जाएगा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह दावा सही नहीं है। प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य आम उपभोक्ताओं से शुल्क लेना नहीं, बल्कि कुछ विशेष श्रेणी के व्यावसायिक लेन-देन (Merchant Transactions) के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को दोबारा लागू करने पर विचार करना है।
रोजमर्रा के UPI इस्तेमाल पर नहीं पड़ेगा असर
दैनिक जरूरतों जैसे दूध, सब्जी, किराना, राशन या ऑटो-टैक्सी का भुगतान करने वाले सामान्य उपभोक्ताओं को किसी अतिरिक्त शुल्क का भुगतान नहीं करना होगा। सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव केवल ₹2000 से अधिक के उन लेन-देन पर केंद्रित है, जो व्यापारिक प्रतिष्ठानों और बड़े कमर्शियल संस्थानों से जुड़े हैं।
व्यक्ति से व्यक्ति (C2C) ट्रांजेक्शन पहले की तरह मुफ्त
यदि कोई व्यक्ति अपने दोस्त, रिश्तेदार या परिवार के सदस्य को यूपीआई के माध्यम से ₹2000 या उससे अधिक की राशि भेजता है, तो उस पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं लगेगा। उपभोक्ता-से-उपभोक्ता (Consumer to Consumer) भुगतान पूरी तरह निशुल्क रहेगा। वहीं, सामान्य यूपीआई लेन-देन की दैनिक सीमा पहले की तरह ₹1 लाख बनी रहेगी। अस्पतालों, स्कूल-कॉलेज की फीस और कर (Tax) भुगतान जैसी कुछ विशेष श्रेणियों में यह सीमा पहले से अधिक निर्धारित है।
क्या होता है MDR?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वह शुल्क है, जिसे डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी बैंक और पेमेंट सेवा प्रदाताओं, जैसे Paytm, PhonePe और Google Pay, को अदा करते हैं। इसका भुगतान ग्राहक नहीं, बल्कि भुगतान प्राप्त करने वाला व्यापारी करता है। इसलिए प्रस्तावित व्यवस्था का सीधा प्रभाव बैंकिंग प्रणाली, यूपीआई सेवा प्रदाताओं और बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर पड़ने की संभावना है।
सिर्फ सीमित ट्रांजेक्शन होंगे प्रभावित
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई के माध्यम से होने वाले लगभग 95 प्रतिशत लेन-देन ₹2000 से कम के होते हैं। ऐसे में यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो केवल लगभग 5 प्रतिशत ऐसे ट्रांजेक्शन इसके दायरे में आएंगे, जिनकी राशि ₹2000 से अधिक होगी और भुगतान किसी मर्चेंट अकाउंट में किया जाएगा।
चार्ज कितना हो सकता है, लागू होने की तारीख तय नहीं
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ₹2000 से अधिक के व्यावसायिक यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित MDR दर 0.25 प्रतिशत से 0.4 प्रतिशत के बीच हो सकती है। फिलहाल 25 से 30 बेसिस पॉइंट्स तक शुल्क निर्धारित करने पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि, सरकार ने अभी तक इस प्रस्ताव को लागू करने की कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की है।
उल्लेखनीय है कि जनवरी 2020 में सरकार ने डिजिटल इंडिया अभियान को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से यूपीआई और RuPayडेबिट कार्ड के माध्यम से होने वाले लेन-देन पर MDR शुल्क समाप्त कर दिया था।