दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 7 अगस्त: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के पेपर लीक प्रकरण में CBI ने दिल्ली की राउज एवेन्यू स्पेशल कोर्ट में विस्तृत चार्जशीट पेश कर दी है। एजेंसी की जांच में सामने आया है कि यह कोई मामूली गड़बड़ी नहीं थी, बल्कि NTA के भीतर से शुरू होकर कई राज्यों तक फैला एक सुनियोजित गिरोह का काम था।
CBI के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क में NTA के प्रश्न-निर्माता, कोचिंग से जुड़े लोग, बिचौलिए और राजस्थान व केरल में सक्रिय स्थानीय कड़ियां शामिल थीं।
NTA के 3 विशेषज्ञों ने किया खेल
चार्जशीट में कहा गया है कि साजिश की शुरुआत परीक्षा से काफी पहले NTA की गोपनीय प्रश्न-निर्माण और अनुवाद प्रक्रिया के दौरान हुई। NTA से जुड़े तीन विषय विशेषज्ञों ने अपने पद का दुरुपयोग किया।
इनमें केमिस्ट्री के विशेषज्ञ प्रहलाद विट्ठलराव कुलकर्णी, बॉटनी की विशेषज्ञ मनीषा गुरुनाथ मंधारे और फिजिक्स की विशेषज्ञ मनीषा संजय हवलदार का नाम है।
आरोप है कि सुरक्षा जांच न होने का फायदा उठाकर कुलकर्णी ने केमिस्ट्री के 135 सवालों वाले तीन सेटों में से आसान प्रश्न याद कर लिए और होटल में जाकर उन्हें नोट कर लिया। कठिन सवालों के लिए उन्होंने छोटे-छोटे कागजों पर नोट्स बना लिए। वहीं मंधारे ने NCERT की उन इकाइयों को चिन्हित कर दिया जहां से प्रश्न लिए गए थे। इन तीनों ने मिलकर कई दिन में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के पेपर को दोबारा तैयार कर बाहर पहुंचा दिया।
ऐसे आगे बढ़ी लीक की कड़ी
CBI के अनुसार NTA से जुड़ी मनीषा संजय वाघमारे ने लीक प्रश्न धनंजय लोखंडे को दिए। लोखंडे ने नासिक के शुभम खैरनार को 25 लाख रुपये में बेचे। खैरनार से प्रश्न यश यादव तक पहुंचे, जिसने टेलीग्राम के माध्यम से उन्हें राजस्थान के मांगीलाल बिवाल को भेज दिया।
लेन-देन की गारंटी के लिए मांगीलाल ने अपनी 10वीं और 12वीं की असली मार्कशीट और एक हस्ताक्षरित खाली चेक बतौर जमानत जमा कराया था।
राजस्थान बना केंद्र: सीकर-झुंझुनू में सौदा
राजस्थान में पेपर का वितरण हुआ। सीकर और झुंझुनू इस नेटवर्क के मुख्य ठिकाने बने। चार्जशीट में बताया गया कि झुंझुनू बाईपास पर एक काली हुंडई वरना में मांगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल तीनों विषयों के छपे हुए सेट लेकर आए। यहां अमित कुमार मीणा और रोहित मावलिया उन्हें लेने पहुंचे थे।
आर्थिक दिक्कतों के चलते दिनेश के बेटे ऋषि बिवाल ने अमित को प्रस्ताव दिया कि 10-12 अभ्यर्थी लाए जाएं तो पेपर मुफ्त दिया जाएगा। यहां भी नकदी के बदले 4 छात्रों की असली मार्कशीट जमानत के तौर पर रखी गई। शर्त रखी गई कि परीक्षा में 150 से अधिक प्रश्न मेल खाएंगे तभी भुगतान होगा।
हालांकि, इस साजिश का हिस्सा रहे ऋषि बिवाल को 720 में से केवल 107 अंक ही मिल पाए।
केरल तक पहुंचे तार
यह गठजोड़ राजस्थान तक सीमित नहीं रहा। सीकर स्थित RK एजुकेशनल कंसल्टेंसी से व्हाट्सएप पर भेजी गई 500 सवालों वाली PDF केरल के अदूर में स्थित माउंट जायन मेडिकल कॉलेज के MBBS छात्र लक्ष्य राज तक पहुंची। लक्ष्य के मित्र रजत चौधरी ने अपने भाई ऋषभ चौधरी के लिए PhonePe से 30,000 रुपये ट्रांसफर किए। परीक्षा से कुछ घंटे पहले ऋषभ को 450 हल किए हुए सवालों की PDF मिल गई।
पर्दाफाश कैसे हुआ
इस पूरे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ सीकर के केमिस्ट्री शिक्षक शशिकांत सुथार की सतर्कता से हुआ। उन्होंने व्हाट्सएप पर वायरल हो रहे गेस पेपर को असली प्रश्नपत्र से मिलता-जुलता पाया और इसकी शिकायत NTA को ईमेल व राजस्थान पुलिस को की।
राजस्थान SOG की शुरुआती जांच के बाद 12 मई को CBI ने FIR दर्ज कर SIT गठित की। पर्याप्त सबूत मिलने पर 3 मई 2026 को परीक्षा रद्द कर 21 तारीख को दोबारा NEET-UG कराया गया।
अब CBI ने राउज एवेन्यू कोर्ट में NTA के 3 विशेषज्ञों सहित कुल 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। सभी पर भारतीय न्याय संहिता, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम 2024 के तहत मामला दर्ज किया गया है।