दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 8 अगस्त 2026 : भारत के खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने शराब बनाने वाली दिग्गज कंपनी डियाजियो को उसके लोकप्रिय व्हिस्की ब्रांड रॉयल चैलेंज के लेबल पर किए गए दावे को लेकर चेतावनी दी है। एक गोपनीय सरकारी नोटिस के अनुसार, कंपनी ने अपनी व्हिस्की के बारे में दावा किया था कि इसे अमेरिकी ओक की लकड़ी के पीपों में परिपक्व किया गया है, जबकि उत्पाद का बड़ा हिस्सा वास्तव में परिपक्व नहीं किया गया था।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण का यह नोटिस 20 जुलाई को जारी किया गया था। यह मामला उस कार्रवाई के अतिरिक्त है, जिसके तहत इसी महीने कुछ राज्यों में डियाजियो और भारतीय कंपनी इनब्रू के कुछ शराब उत्पादों की बिक्री पर कृत्रिम स्वादकारी पदार्थों के इस्तेमाल को लेकर रोक लगाई गई है।
रॉयल चैलेंज के लेबल पर क्या दावा था?
खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने डियाजियो को भेजे नोटिस में कहा कि रॉयल चैलेंज व्हिस्की के लेबल पर इसे भारतीय अनाज से बने मद्यसार और आयातित स्कॉच के मिश्रण के रूप में बताया गया है तथा इसे अमेरिकी ओक की लकड़ी के पीपों में परिपक्व किया गया बताया गया है।
लेकिन नियामक के अनुसार, इस उत्पाद में खनिज रहित जल के बाद दूसरा प्रमुख घटक अनाज से बना तटस्थ मद्यसार है और मिश्रण का बड़ा हिस्सा ऐसा मद्यसार है, जिसे लकड़ी के पीपों में परिपक्व नहीं किया गया।
प्राधिकरण ने कहा कि पूरे मद्यसार को लकड़ी के पीपों में परिपक्व नहीं किया गया है। इसलिए लेबल पर किया गया दावा उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाला हो सकता है।
सबसे कम उम्र वाले मद्यसार के आधार पर होना चाहिए दावा
नियामक ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी मिश्रित शराब में उम्र से संबंधित दावा करते समय इस्तेमाल किए गए सबसे कम उम्र वाले मद्यसार को आधार बनाया जाना चाहिए, न कि सबसे पुराने मद्यसार को।
प्राधिकरण ने डियाजियो के लेबल पर लिखे ‘स्कॉच’ शब्द को लेकर भी सवाल उठाया है। नियामक के अनुसार, केवल ‘स्कॉच’ लिखने से यह स्पष्ट नहीं होता कि वास्तव में किस प्रकार का स्कॉच इस्तेमाल किया गया है। कंपनी को इस्तेमाल किए गए स्कॉच की वास्तविक विशेषताओं के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी होगी।
कौन-कौन से ब्रांड कार्रवाई के दायरे में?
खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की हालिया कार्रवाई में मध्य प्रदेश में निर्मित डियाजियो के एंटिक्विटी ब्लू व्हिस्की और रॉयल चैलेंज व्हिस्कीशामिल हैं।
इसके अलावा, इसी राज्य में निर्मित इनब्रू की बैगपाइपर डिलक्स व्हिस्की और ओल्ड कास्क डिलक्स ट्रिपल एक्स रम भी कार्रवाई के दायरे में आए हैं।
नियामक की कार्रवाई में मुख्य मुद्दा ऐसे कृत्रिम स्वादकारी पदार्थों के इस्तेमाल से जुड़ा है, जिनका उपयोग उचित परिपक्वता प्रक्रिया और निर्धारित सामग्री के बजाय शराब को स्वाद एवं सुगंध देने के लिए किया गया।
रॉयल चैलेंज की बिक्री कितनी बड़ी है?
भारत में रॉयल चैलेंज, डियाजियो के सबसे अधिक बिकने वाले घरेलू उत्पादों में शामिल है। कंपनी के अनुसार, देश में हर साल इसके 45 लाख से अधिक नौ-लीटर पेटी बिकती हैं। कंपनी इसे मध्यम प्रीमियम मूल्य वर्ग का उत्पाद बताती है।
भारत में शराब की कीमतें राज्य-दर-राज्य अलग होती हैं। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में रॉयल चैलेंज व्हिस्की की 375 मिलीलीटर बोतल की कीमत करीब 360 रुपये बताई गई है।
कंपनी ने क्या कहा?
रॉयल चैलेंज की निर्माता कंपनी की भारतीय इकाई यूनाइटेड स्पिरिट्स ने इस सप्ताह शेयर बाजारों को दी जानकारी में कहा कि उसे इस कार्रवाई से किसी महत्वपूर्ण वित्तीय प्रभाव की उम्मीद नहीं है। हालांकि, कंपनी ने मामले पर करीबी नजर रखने की बात कही है।
क्या पूरे भारत में रॉयल चैलेंज पर प्रतिबंध लगा है?
खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की कार्रवाई को पूरे भारत में रॉयल चैलेंज ब्रांड पर पूर्ण प्रतिबंध के तौर पर समझना सही नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्रवाई विशेष रूप से कुछ राज्यों में निर्मित और नियामकीय जांच के दायरे में आए उत्पादों से संबंधित है।
क्या है पूरा मामला?
खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ने रॉयल चैलेंज के लेबल पर अमेरिकी ओक की लकड़ी के पीपों में परिपक्व किए जाने के दावे और उत्पाद में इस्तेमाल किए गए मद्यसार की वास्तविक संरचना पर सवाल उठाए हैं। इसके साथ ही शराब में कृत्रिम स्वादकारी पदार्थों के इस्तेमाल को लेकर भी नियामक ने सख्त रुख अपनाया है।