प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन मामले में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, सतीश सेठ और अन्य के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की
दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 9 अगस्त : प्रवर्तन निदेशालय ने अनिल अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, सतीश सेठ और अन्य के खिलाफ कथित धन शोधन मामले में अभियोजन शिकायत दाखिल की है। मामला भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा प्रदान की गई चार टोल सड़क परियोजनाओं से करीब 187 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय हेराफेरी से जुड़ा है।
प्रवर्तन निदेशालय ने 8 अगस्त 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत नई दिल्ली की द्वारका जिला अदालत स्थित विशेष धन शोधन निवारण अदालत में शिकायत दाखिल की।
चार राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं से जुड़ा मामला
जांच एजेंसी के अनुसार, एक कथित संगठित योजना के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से मिली चार टोल सड़क परियोजनाओं की सार्वजनिक धनराशि को दूसरी जगह भेजा गया।
इन परियोजनाओं में त्रिची-करूर राष्ट्रीय राजमार्ग-67, त्रिची-दिंडीगुल राष्ट्रीय राजमार्ग-45, सेलम-उलुंदरपेट राष्ट्रीय राजमार्ग-68 और जयपुर-रींगस राष्ट्रीय राजमार्ग-11 शामिल हैं।
इन परियोजनाओं के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अनुदान के साथ-साथ बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ऋण भी लिया गया था।
फर्जी उप-ठेके के नाम पर रकम स्थानांतरित करने का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि सितंबर और अक्टूबर 2010 के दौरान करीब 187 करोड़ रुपये की धनराशि को फर्जी, बाद में बनाए गए और पिछली तारीख के दस्तावेजों के माध्यम से दूसरी जगह भेजा गया।
कागजों में इन लेन-देन को वास्तविक उप-ठेके के काम के भुगतान के रूप में दर्शाया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, धनराशि रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर या उसकी परियोजना-विशिष्ट विशेष प्रयोजन संस्थाओं तथा निर्माण कार्य के ठेकेदारों के माध्यम से ऐसी कंपनियों तक पहुंचाई गई, जिनका सड़क निर्माण परियोजनाओं से कोई संबंध नहीं था।
कागजात तैयार कर लेन-देन को वास्तविक दिखाने का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, बाद में ऐसे दस्तावेज तैयार किए गए जिनसे इन लेन-देन को वास्तविक परियोजना खर्च के रूप में दिखाया जा सके।
इसके बाद धनराशि को कथित तौर पर कई मुखौटा कंपनियों और हीरा कारोबारियों के माध्यम से अलग-अलग स्तरों पर घुमाया गया।
मामले की प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि मुखौटा कंपनियों को कथित तौर पर जाली दस्तावेजों और बैंक खातों के माध्यम से चलाया गया। इसके अलावा फर्जी चालानों और अधिक मूल्य दर्शाकर किए गए हीरा आयात के माध्यम से धनराशि विदेश भेजे जाने की भी जांच की जा रही है।
187 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने 3 अगस्त 2026 को करीब 187 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की थीं।
कुर्क की गई संपत्तियों में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के पास मौजूद अचल संपत्तियां और रिलायंस पावर लिमिटेड के शेयर शामिल हैं। इसके अलावा क्षीराब्द कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड के पास मौजूद जमीन को भी कुर्क किया गया है।
सतीश सेठ 12 जून से न्यायिक हिरासत में
मामले में सतीश सेठ को प्रवर्तन निदेशालय ने 12 जून 2026 को गिरफ्तार किया था। वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
प्रवर्तन निदेशालय ने कहा है कि मामले में आगे की जांच जारी है। जांच एजेंसी कथित धन शोधन तंत्र में शामिल अन्य लोगों की भूमिका का भी पता लगा रही है।
महत्वपूर्ण: ये आरोप प्रवर्तन निदेशालय की जांच और अभियोजन शिकायत पर आधारित हैं। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में होने वाली कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।