दैनिक खबरनामा। शिमला, 11 अगस्त: हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र SEOC के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में 259 सड़कें बंद पड़ी हैं और 255 वितरण ट्रांसफार्मर ठप होने से बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है।
सबसे ज्यादा प्रभावित मंडी
सड़कों के बंद होने के मामले में मंडी जिला सबसे ज्यादा चपेट में आया है। यहां अकेले 88 मार्ग यातायात के लिए बंद हैं। इसके बाद कुल्लू में 39 और शिमला में 13 सड़कें बंद बताई गई हैं।
अब तक 155 लोगों की मौत
मानसून जनित आपदाओं को लेकर SEOC की रिपोर्ट में कुल 155 मौतों की पुष्टि की गई है। इनमें 68 मौतें प्राकृतिक आपदा के कारण हुई हैं, जबकि 87 लोगों ने सड़क हादसों में जान गंवाई।

आपदा से हुई मौतों में मंडी में सबसे अधिक 14 लोग मारे गए। कांगड़ा में 11, चंबा और शिमला में 9-9 तथा कुल्लू में 8 लोगों की जान गई। भूस्खलन, पेड़-पत्थर गिरना, डूबना, अचानक बाढ़ और आग जैसी घटनाएं इन मौतों की मुख्य वजह बनीं।
सड़क दुर्घटनाओं में चंबा में 15, कुल्लू और शिमला में 12-12 और कांगड़ा में 10 लोगों की मृत्यु हुई।
83 सौ करोड़ से अधिक का अनुमानित नुकसान
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य को अब तक करीब 8,352.62 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कुल अनुमानित क्षति 83,526.19 लाख रुपये आंकी गई है।

इसमें सबसे बड़ा झटका लोक निर्माण विभाग को लगा है, जिसे 61,585.43 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। जल शक्ति विभाग को लगभग 19,986.05 लाख रुपये की हानि का अनुमान है।
आवासीय और व्यावसायिक ढांचे भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 213 मकान पूरी तरह ध्वस्त हुए हैं, 620 को आंशिक नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा 256 कच्चे-पक्के झुग्गी-झोपड़े और 22 दुकानें भी प्रभावित हुई हैं। आपदा में 200 मवेशियों की मौत हुई और 160 पशुशालाएं क्षतिग्रस्त हुईं।
राहत और बहाली में जुटी टीमें
प्रशासन की टीमें युद्धस्तर पर काम कर रही हैं। बंद रास्तों को खोलना, बिजली व्यवस्था दुरुस्त करना और पेयजल योजनाओं की मरम्मत करना प्राथमिकता में रखा गया है। अधिकारियों ने बताया कि सबसे ज्यादा प्रभावित उपमंडलों में मुख्य सड़कों और जरूरी सेवाओं को पहले बहाल किया जा रहा है, ताकि लोगों को जल्द राहत मिल सके।