दैनिक खबरनामा। श्रीनगर, 15 अगस्त: स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक बार फिर केंद्र से राज्य का दर्जा बहाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर से जो अधिकार और पहचान वापस ली गई थी, उसे अब लौटाना जरूरी है।
शनिवार को श्रीनगर में आयोजित समारोह में बोलते हुए उमर अब्दुल्ला ने देश के स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को नमन किया। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त सिर्फ जश्न का दिन नहीं है, बल्कि यह आत्म-मूल्यांकन का भी अवसर है। आजादी के बाद बीते 80 वर्षों में हमने क्या हासिल किया और आगे किन बदलावों की जरूरत है, इस पर सोचने की जरूरत है।

शेख अब्दुल्ला और 1947 के प्रतिरोध को किया याद
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को याद किया। उन्होंने उन्हें राज्य का सबसे बड़ा नेता और एक बहादुर शख्सियत बताया। उमर ने कहा कि आज के दिन उनके योगदान का जिक्र किए बिना कोई भी चर्चा अधूरी है।
उन्होंने 1947 में कबायली हमले के खिलाफ स्थानीय लोगों के प्रतिरोध का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, भारतीय सेना के पहुंचने से पहले ही गांवों और कस्बों के लोगों ने हमलावरों का मुकाबला किया। जिनके पास हथियार थे उन्होंने लड़ाई लड़ी और जिनके पास नहीं थे उन्होंने दूसरे तरीकों से विरोध किया। इस दौरान हजारों लोगों ने जान गंवाई। उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता मास्टर अब्दुल अजीज को भी याद किया, जो मुजफ्फराबाद में हमले का विरोध करते हुए शहीद हुए थे।
पीओके के लोगों को बताया अपना
उमर अब्दुल्ला ने नियंत्रण रेखा के पार रहने वाले लोगों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वहां के निवासी हमारे ही हैं और उन्हें पराया नहीं समझा जा सकता। वहां की स्थिति को उन्होंने दुखद और चिंताजनक बताया।
उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आज भी उस क्षेत्र के लिए सीटें आरक्षित हैं। उन्हें उम्मीद है कि एक दिन वहां के लोग आकर इन सीटों पर प्रतिनिधित्व करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि एलओसी के दोनों ओर रहने वाले लोगों के बीच पारिवारिक और भावनात्मक रिश्ते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
संघीय ढांचे को मजबूत करने की वकालत
मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र और संघवाद को भारत की ताकत बताया। उन्होंने कहा कि राज्यों के अधिकारों की रक्षा करनी होगी और संघीय व्यवस्था को सिर्फ कागजों पर नहीं, जमीन पर भी मजबूत करना होगा।
“जो हमसे लिया गया है, वह हमें वापस मिलना चाहिए”, यह कहते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका मतलब सिर्फ जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा देना नहीं है, बल्कि सभी राज्यों को उनके संवैधानिक अधिकार देना भी है। उनके मुताबिक जम्मू-कश्मीर इस प्रक्रिया की शुरुआत बन सकता है।
उन्होंने चिंता जताई कि जब केंद्रीय एजेंसियां राज्यों के काम में दखल देती हैं तो संघीय ढांचा कमजोर होता है। शिक्षा और स्वास्थ्य को उदाहरण देते हुए कहा कि ये विषय पारंपरिक रूप से राज्यों के पास रहे हैं। नीट, जेईई और नेट जैसी राष्ट्रीय परीक्षाएं आईआईटी, आईआईएम जैसे संस्थानों के लिए ठीक हैं, लेकिन राज्य स्तरीय कॉलेजों को अपनी प्रवेश प्रक्रिया तय करने की आजादी होनी चाहिए।
पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य पर जोर
भर्ती प्रक्रियाओं में उठे सवालों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आरोपों के बाद जांच और सुधार का वादा किया गया है। उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा बनाने में सालों लगते हैं और टूटने में कुछ पल। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जम्मू-कश्मीर में भर्ती और प्रवेश पूरी तरह योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर होंगे।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार, विपक्ष और मीडिया तीनों की भूमिका अहम है। सरकार को शासन चलाना है, विपक्ष को जवाबदेही तय करनी है और मीडिया को सवाल पूछने हैं।
अपने ढाई साल के कार्यकाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार जनता के लिए काम कर रही है। ग्रामीण इलाकों समेत सभी युवाओं के लिए रोजगार और बेहतर अवसर पैदा करना प्राथमिकता है। विकास सिर्फ घोषणाओं से नहीं होगा, इसके लिए लगातार काम करना पड़ेगा।
अंत में मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी और उम्मीद जताई कि आने वाले 80 साल पिछले आठ दशकों से ज्यादा समृद्ध, शांतिपूर्ण और एकजुट होंगे।