दैनिक खबरनामा। जम्मू, 17 अगस्त:जम्मू-कश्मीर में जनसांख्यिकीय बदलावों की जांच कर रही हाई-लेवल कमेटी के सामने सरकार ने रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को लेकर ताजा आंकड़े रखे हैं। आंकड़ों के मुताबिक केंद्र शासित प्रदेश में इन दोनों समूहों की बड़ी संख्या जम्मू संभाग में रह रही है।

HLCDC की बैठक 10 अगस्त को जम्मू में हुई थी। कमेटी के चार सदस्यों ने सीमा और आसपास के इलाकों में आबादी में आए बदलावों का जायजा लिया। इसी दौरान प्रशासन ने दोनों क्षेत्रों का तुलनात्मक डेटा पेश किया।

जम्मू और घाटी का आंकड़ा

सरकारी रिपोर्ट के अनुसार जम्मू संभाग के 10 जिलों में 6,737 रोहिंग्या और 46 बांग्लादेशी नागरिक चिन्हित किए गए हैं। वहीं कश्मीर घाटी में 919 रोहिंग्या और 458 बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान हुई है। इस हिसाब से जम्मू में रोहिंग्याओं की संख्या घाटी से करीब 7 गुना अधिक है।

कानूनी कार्रवाई के आंकड़े भी अलग हैं। जम्मू में रोहिंग्याओं के खिलाफ अब तक 101 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें 179 पुरुष और 21 महिलाएं शामिल हैं। घाटी में 16 मामले दर्ज हैं, जिनमें 41 महिलाएं और 4 पुरुष हैं।

सीमा क्षेत्र में मौजूदगी बनी चिंता

अधिकारियों ने कमेटी को बताया कि पिछले दो वर्षों में रोहिंग्या बस्तियों की संख्या में मामूली इजाफा हुआ है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों में उनकी मौजूदगी को सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से देख रही हैं। अधिकारियों के अनुसार कुछ लोगों पर संगठित अपराध, नशे की तस्करी और मानव तस्करी में लिप्त होने के आरोप हैं।

जम्मू के जिन 10 जिलों में रोहिंग्या बस्तियां मिली हैं, उनमें डोडा, जम्मू, कठुआ, किश्तवाड़, पुंछ, राजौरी, रियासी, सांबा, उधमपुर और रामबन शामिल हैं।

घाटी में यह सूची श्रीनगर, बडगाम, गांदरबल, अनंतनाग, पुलवामा, शोपियां, कुलगाम, बारामूला, बांदीपोरा और कुपवाड़ा तक फैली है।

राजनीतिक चर्चा और जमीनी हकीकत में फर्क

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बैठक में सीमा से लगे जिलों में अवैध बसावट और निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर लंबी चर्चा हुई। कमेटी ने उन सामाजिक संगठनों से भी बात की जो इन शिविरों में काम करते हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि रोहिंग्या मुद्दे पर हो रही राजनीतिक बयानबाजी और उनकी वास्तविक भौगोलिक स्थिति में काफी अंतर है।

अधिकारी के मुताबिक धार्मिक आधार पर ज्यादातर रोहिंग्या मुस्लिम हैं, फिर भी इनकी बहुसंख्या घाटी की जगह जम्मू में बसी है। उन्होंने बताया कि म्यांमार से आने के बाद कई परिवार पहले हैदराबाद पहुंचे थे। बाद में 2012 और 2017 के दौरान बड़ी ताद में लोग जम्मू आकर बस गए।

तस्करी और शोषण के आरोप

रिपोर्ट में कुछ और गंभीर आरोपों का जिक्र है। सूत्रों ने बताया कि कुछ रोहिंग्या महिलाओं को जम्मू से घाटी लाकर कश्मीरी पुरुषों से अनौपचारिक तौर पर शादी कराई गई। जांच में ऐसे मामले भी मिले हैं जहां महिलाओं को जबरदस्ती और यौन शोषण का शिकार होना पड़ा।

एक सूत्र ने कहा, “हाल के वर्षों में मानव तस्करी के ऐसे कई मामले सामने आए हैं।” साथ ही नशे से जुड़े मामलों में कुछ रोहिंग्याओं की संलिप्तता को भी चिंताजनक बताया गया।

HLCDC का गठन और मकसद

गृह मंत्रालय ने जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करने और उसके समाधान सुझाने के लिए 26 मई को HLCDC का गठन किया था। कमेटी को एक साल के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है। इसके कार्यक्षेत्र में भारत में रह रहे प्रवासियों को कानूनी प्रक्रिया के तहत, तय समयसीमा में हिरासत में लेने या वापस भेजने के लिए एक स्थायी व्यवस्था बनाने की सिफारिश भी शामिल है।

कौन हैं रोहिंग्या

रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन प्रांत का मुख्य रूप से मुस्लिम समुदाय है। 2012 और 2017 में वहां हुई सांप्रदायिक हिंसा और सैन्य कार्रवाई के बाद बड़ी संख्या में लोग विस्थापित होकर भारत पहुंचे थे।

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