दैनिक खबरनामा | चंडीगढ़, 23 अक्टूबर 2026. पंजाब में नहरी सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार ने 7,500 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसके परिणामस्वरूप नहरी पानी के इस्तेमाल का स्तर करीब 26 फीसदी से बढ़कर 80 फीसदी हो गया है, जबकि नहरी सिंचाई के दायरे में आने वाला क्षेत्र 20.89 लाख एकड़ से बढ़कर 61 लाख एकड़ पहुंच गया है। यह जानकारी जल संसाधन मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने शुक्रवार को पंजाब विधानसभा में दी।
बाबा बकाला के विधायक दलवीर सिंह द्वारा निर्वाचन क्षेत्र में नहरी पानी की आपूर्ति और खालों की लाइनिंग से संबंधित सवाल के जवाब में कैबिनेट मंत्री ने बताया कि क्षेत्र में कुल 108.71 किलोमीटर लंबा नहरी नेटवर्क सिंचाई की जरूरतें पूरी करता है। यह नेटवर्क अपर बारी दोआब नहर प्रणाली की सभरांव शाखा से जुड़ा है। इसके तहत सात वितरिकाओं और पांच माइनरों के माध्यम से किसानों तक पानी पहुंचाया जाता है।
मंत्री ने बताया कि बाबा बकाला क्षेत्र में 31.44 किलोमीटर नहरों की कंक्रीट लाइनिंग का काम 21.97 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जा चुका है। शेष करीब 77 किलोमीटर हिस्से की लाइनिंग तकनीकी व्यवहार्यता, प्राथमिकता और उपलब्ध धन के आधार पर चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।
विधायक द्वारा राय्या, नगोके, भिंडर और घग्गर भाना राजबाहों से जुड़े मुद्दे उठाए जाने पर गोयल ने बताया कि ये नहरें सामूहिक रूप से करीब 28,540 एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि लाइनिंग के शेष कार्यों को आगे बढ़ाने से पहले उनकी व्यवहार्यता का आकलन किया जाएगा।
बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में सरकार का जोर नहरी पानी को खेतों के अंतिम छोर तक पहुंचाने पर है, ताकि किसानों को सिंचाई के लिए भरोसेमंद आपूर्ति मिल सके। उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन के दौरान बाबा बकाला क्षेत्र की विभिन्न वितरिकाओं में पानी का प्रवाह उनकी निर्धारित क्षमता के 100 से 132.8 फीसदी तक दर्ज किया गया।
मंत्री के अनुसार, वर्ष 2022 से पहले पंजाब में नहरों में पानी का औसत प्रवाह करीब 26 हजार क्यूसेक था, जो अब बढ़कर 40 हजार क्यूसेक तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य राज्य को उपलब्ध नहरी पानी के पूरे हिस्से का कृषि जरूरतों के लिए इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।