दैनिक खबरनामा। जम्मू, 18 अगस्त: भर्ती नियमों को अधिसूचित करने में हो रही देरी के विरोध में जम्मू-कश्मीर के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों के गैर-राजपत्रित कर्मचारी मंगलवार से सड़कों पर उतर आए हैं। कश्मीर घाटी में GMC बारामुला और GMC अनंतनाग के कर्मचारियों के हड़ताल में शामिल होने के बाद प्रदेश के पांचों नए मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठहर गई हैं।
इससे पहले जम्मू संभाग के कठुआ, राजौरी और डोडा मेडिकल कॉलेजों में यह आंदोलन सोमवार से ही शुरू हो चुका था। मंगलवार को हड़ताल के दूसरे दिन तीनों कॉलेजों में कर्मचारियों ने जगह-जगह प्रदर्शन किए और अपनी मांगों के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान भी चलाया।
कश्मीर के दोनों कॉलेजों में कामकाज बंद
मंगलवार को बारामुला और अनंतनाग मेडिकल कॉलेज के गैर-राजपत्रित कर्मचारियों ने परिसर के भीतर धरना देकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान किया। दोनों संस्थानों में ओपीडी पूरी तरह बंद रही और निर्धारित रूटीन सर्जरियां भी नहीं हो सकीं।
कर्मचारियों का कहना है कि उनकी नियुक्ति करीब सात साल पहले हुई थी। उस समय इन अस्पतालों में 300 बिस्तर थे, जो अब बढ़कर 500 हो गए हैं। मरीजों की संख्या और काम का दबाव कई गुना बढ़ा है, लेकिन सेवा भर्ती नियम नहीं बनने के कारण उनकी तरक्की अटकी हुई है।
“सात साल में एक भी पदोन्नति नहीं”
प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि अन्य मेडिकल कॉलेजों की तुलना में उन्हें कम वेतनमान मिल रहा है। नियमों के अनुसार सात वर्षों में उन्हें दो बार पदोन्नति मिलनी चाहिए थी, लेकिन अब तक एक बार भी ऐसा नहीं हुआ।
उनका कहना है कि उनके साथ ही भर्ती हुए राजपत्रित संवर्ग के अधिकारियों की पदोन्नति हो चुकी है, जबकि गैर-राजपत्रित स्टाफ को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार बार-बार सिर्फ आश्वासन देती है, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते।
मरीजों को भारी परेशानी
हड़ताल की वजह से आम लोगों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे तो ओपीडी बंद देखकर उन्हें वापस लौटना पड़ा। इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर अन्य जांचें और प्रक्रियाएं भी बाधित रहीं।
कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सेवा भर्ती नियम अधिसूचित नहीं किए जाते और पदोन्नति का रास्ता नहीं खुलता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।