दैनिक खबरनामा। नई दिल्ली, 19 अगस्त: ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती देते हुए रक्षा मंत्रालय ने रक्षा उत्पादन में आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में एक और बड़ा फैसला लिया है। मंत्रालय ने मंगलवार को 405 सामरिक महत्व की वस्तुओं की छठी ‘सकारात्मक स्वदेशीकरण सूची’ जारी की। इन सभी वस्तुओं को अब तक विदेशों से मंगाया जाता रहा है और इनका अनुमानित वार्षिक कारोबार करीब 3,070 करोड़ रुपये आंका गया है।
इस नई सूची में विभिन्न लाइन रिप्लेसेबल यूनिट्स, सब-सिस्टम, उप-असेंबली, कलपुर्जे, घटक और कच्चे माल को शामिल किया गया है। कुल 405 आइटमों में से 16 वस्तुएं भारतीय तटरक्षक बल यानी आईसीजी से जुड़ी हैं, जबकि 389 आइटम सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रमों यानी डीपीएसयू से संबंधित हैं।
जारी की गई छठी सूची में वायु, थल और जल तीनों क्षेत्रों के प्लेटफॉर्म कवर किए गए हैं। इसमें एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर, लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, एसयू-30एमकेआई, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और एएल-31एफपी इंजन जैसे हवाई प्लेटफॉर्म शामिल हैं। जमीन पर टी-72, टी-90 और बीएमपी-। जैसे बख्तरबंद वाहन, वहीं समुद्र में विभिन्न युद्धपोतों के लिए जरूरी उपकरण भी हैं। इसके अलावा कोंकर्स-एम, इंवार और एमआरएसएएम जैसी मिसाइल प्रणालियां भी इस दायरे में हैं।
रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र से रडार, सोनार, फायर कंट्रोल सिस्टम और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम को भी सूची में रखा गया है। साथ ही हाई एक्सप्लोसिव एंटी-टैंक गोला-बारूद समेत अन्य जरूरी रक्षा साजो-सामान भी शामिल हैं। मंत्रालय ने हर एक आइटम को देश में बनाने के लिए एक तय समय-सीमा भी तय की है।
मंत्रालय के अनुसार, निर्धारित समय-सीमा के भीतर इन वस्तुओं का सफलतापूर्वक स्वदेशीकरण होने के बाद इनकी खरीद सिर्फ भारतीय रक्षा उद्योग से ही की जाएगी।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह छठी सूची ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत रक्षा निर्माण को आत्मनिर्भर बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता का हिस्सा है। इससे न सिर्फ घरेलू कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे, बल्कि नवाचार को भी गति मिलेगी और विदेशी आयात पर निर्भरता घटेगी। सभी वस्तुओं की स्वदेशीकरण की समय-सीमा की पूरी जानकारी रक्षा मंत्रालय के ‘सृजन’ पोर्टल पर देखी जा सकती है।
आंकड़ों के मुताबिक सृजन पोर्टल शुरू होने के बाद से जून 2026 तक स्वदेशीकरण के लिए 33,000 से अधिक रक्षा उत्पादों को उद्योग के लिए उपलब्ध कराया जा चुका है। इसमें पहले की पांच सूचियों में अधिसूचित 5,012 आइटम भी शामिल हैं।
अब तक 15,700 से ज्यादा रक्षा उत्पादों का सफल स्वदेशीकरण हो चुका है। इसका असर यह हुआ है कि पिछले पांच वर्षों में लगभग 9,000 करोड़ रुपये के आयात में कमी आई है। वहीं मार्च 2026 तक घरेलू रक्षा निर्माताओं को करीब 10,000 करोड़ रुपये के खरीद आदेश जारी किए जा चुके हैं, जिनमें स्वदेश में बने उत्पाद भी शामिल हैं।