बिरसिंहपुर 7 जनवरी (दैनिक खबरनामा)मध्य प्रदेश के सतना जिले की बिरसिंहपुर तहसील में अपराध का एक नया और चिंताजनक चेहरा सामने आया है। यहां कुछ युवक पुलिस की गिरफ्त में आने को शर्म नहीं, बल्कि शान और पहचान का जरिया मानने लगे हैं। जेल जाना अब उनके लिए सजा नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर ‘स्टेटस सिंबल’ बनता जा रहा है।गंभीर आपराधिक मामलों में जेल जाने के बाद जब ये युवक बाहर आते हैं, तो उनमें पछतावे के बजाय खुद को ‘बड़ा दादा’ साबित करने की होड़ दिखाई देती है। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर हथियारों, धमकी भरे गानों और टशन से भरी रीलें डालकर ये युवक खुद को कानून से ऊपर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।यह प्रवृत्ति न सिर्फ कानून-व्यवस्था के लिए खतरा है, बल्कि समाज और परवरिश पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। गली-मोहल्लों में ऐसे युवकों को “भाई जेल होकर आया है” कहकर महिमामंडित किया जाता है, जिससे उनका हौसला और बढ़ जाता है और वे अगली आपराधिक घटना के लिए जल्दी तैयार हो जाते हैं।सोशल मीडिया के दुरुपयोग ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। रील्स और गानों के जरिए अपराध को ग्लैमराइज किया जा रहा है, जिसका सबसे ज्यादा असर किशोर उम्र के बच्चों पर पड़ रहा है। वे इन अपराधियों को हीरो मानकर उसी रास्ते पर चलने की सोचने लगते हैं।जब समाज अपराधी का बहिष्कार करने के बजाय उसका सम्मान करने लगे, तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरे की घंटी है। यह किसी ऊंची सोच का नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक पतन का संकेत है।
पुलिस प्रशासन को चाहिए कि ऐसे ‘सोशल मीडिया गैंगस्टर्स’ पर सख्त कार्रवाई करे और अपराध के महिमामंडन पर प्रभावी रोक लगाए। साथ ही अभिभावकों को भी सजग होने की जरूरत है कि कहीं उनके घर से निकलने वाला ‘रंगबाज’ भविष्य का बड़ा अपराधी न बन जाए।