चंडीगढ़ 8 जनवरी( दैनिक खबरनामा )केंद्र सरकार की प्रमुख ग्रामीण रोजगार योजनाएं चंडीगढ़ में ज़मीन पर असर दिखाती नज़र नहीं आ रही हैं। न तो पहले महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत यहां कोई उल्लेखनीय काम हुआ और न ही अब विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी G-Ram-G का सीधा लाभ दिखाई दे रहा है। इसके बावजूद इस मुद्दे को लेकर चंडीगढ़ में कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है।दरअसल, चंडीगढ़ में पंचायती राज व्यवस्था लगभग नाममात्र की है। यहां न तो नियमित मनरेगा मजदूरों की कोई स्थायी सूची है और न ही ग्रामीण स्तर पर ऐसे प्रोजेक्ट्स चिन्हित किए गए हैं, जिनके तहत रोजगार सृजन हो सके। इसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा G-Ram-G योजना को बड़े पैमाने पर प्रचारित किया जा रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि चंडीगढ़ जैसे केंद्र शासित प्रदेश में यह योजना केवल कागज़ों तक सीमित है। पार्टी का कहना है कि जब न तो मनरेगा का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ और न ही ग्राम पंचायतों की सक्रिय भूमिका है, तो रोजगार और आजीविका की गारंटी कैसे दी जा सकती है।वहीं भाजपा का दावा है कि केंद्र सरकार की मंशा साफ है और G-Ram-G के माध्यम से ग्रामीण विकास को नई दिशा दी जाएगी। भाजपा नेताओं का कहना है कि चंडीगढ़ की प्रशासनिक संरचना अलग होने के कारण योजनाओं के क्रियान्वयन में चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन सरकार समाधान की दिशा में काम कर रही है।इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने 11 जनवरी को चंडीगढ़ में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक ग्रामीण रोजगार को लेकर ठोस नीति और ज़मीनी स्तर पर काम शुरू नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, भले ही चंडीगढ़ में मनरेगा और G-Ram-G का सीधा असर फिलहाल न दिख रहा हो, लेकिन यह मुद्दा आने वाले दिनों में केंद्र और विपक्ष के बीच एक बड़ा सियासी हथियार बन सकता है।