चंडीगढ़ 24 फरवरी 2026 ( दैनिक खबरनामा ) चंडीगढ़। बच्चों में होने वाले खतरनाक दिमागी संक्रमण एंटेरोवायरस एन्सेफलाइटिस की सटीक और समय पर पहचान के लिए चंडीगढ़ पीजीआई के डॉक्टरों ने अहम सफलता हासिल की है। अब एमआरआई और आरटी-पीसीआर जैसी आधुनिक जांच तकनीकों के संयुक्त उपयोग से इस बीमारी की जल्दी और पुख्ता पुष्टि संभव हो सकेगी। इससे इलाज समय पर शुरू कर बच्चों की जान बचाने की संभावना काफी बढ़ जाएगी।अब तक स्थिति यह थी कि तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, दौरे या बेहोशी जैसे लक्षण तो दिखाई देते थे, लेकिन यह स्पष्ट करना कठिन होता था कि संक्रमण किस वायरस से हुआ है। कई बार सामान्य जांच रिपोर्ट से स्पष्ट संकेत नहीं मिल पाते थे, जिससे इलाज में देरी हो जाती थी और जटिलताएं बढ़ने का खतरा रहता था। यह संक्रमण विशेष रूप से छोटे बच्चों को प्रभावित करता है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा साबित हो सकता है।पीजीआई के रेडियोडायग्नोसिस एवं इमेजिंग, बाल रोग और वायरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने मिलकर इस पर विस्तृत शोध किया। अध्ययन में एक महीने से 12 वर्ष तक के 23 बच्चों को शामिल किया गया। संक्रमण की पुष्टि रियल-टाइम आरटी-पीसीआर से की गई, जबकि 3 टेस्ला एमआरआई मशीन से दिमाग की विस्तृत स्कैनिंग की गई। उन्नत तकनीकों की मदद से सूक्ष्म बदलावों की पहचान संभव हो सकी।शोध में पाया गया कि 56 प्रतिशत बच्चों में बेसल गैंग्लिया और 30 प्रतिशत में ब्रेनस्टेम प्रभावित थे। कुछ मामलों में सेरेब्रल भाग और स्पाइनल कॉर्ड में भी संक्रमण के संकेत मिले। यह शोध 5 फरवरी 2026 को Indian Journal of Radiology and Imaging में प्रकाशित हुआ है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में तेज बुखार के साथ दौरे या व्यवहार में बदलाव दिखे तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें। समय पर जांच से स्थायी मस्तिष्क क्षति को रोका जा सकता है।

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विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में तेज बुखार के साथ दौरे या व्यवहार में बदलाव दिखे तो तुरंत विशेषज्ञ से संपर्क करें। समय पर जांच से स्थायी मस्तिष्क क्षति को रोका जा सकता है।

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