दिल्ली 15 जनवरी( दैनिक खबरनामा ) नई दिल्ली। जर्मन चांसलर द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कही गई बातों और पोलैंड के विदेश मंत्री द्वारा विदेश मंत्री एस. जयशंकर के समक्ष दिए गए बयान ने भारत की बदलती विदेश नीति के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। इन घटनाओं से यह साफ होता है कि वैश्विक मंच पर भारत अब पहले से कहीं अधिक आत्मविश्वास के साथ अपने राष्ट्रीय हितों की पैरवी कर रहा है।अप्रैल 2022 में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में आयोजित 2+2 मंत्रिस्तरीय बैठक में शामिल होने गए थे। इस बैठक में उनके साथ अमेरिका के तत्कालीन विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन मौजूद थे।बैठक के बाद हुई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक पत्रकार ने भारत द्वारा रूस से कच्चा तेल खरीदने को लेकर सवाल किया। इस पर विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने बेहद स्पष्ट और सटीक जवाब दिया।जयशंकर ने कहा,यदि आप रूस से ऊर्जा आयात की बात कर रही हैं,तो मेरा सुझाव है कि आपका ध्यान यूरोप पर होना चाहिए।भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए सीमित मात्रा में ऊर्जा आयात कर रहा है। लेकिन यदि आंकड़ों पर नजर डालें,तो संभव है कि पूरे महीने में भारत जितना तेल खरीदता है,यूरोप उतना एक ही दोपहर में खरीद लेता है। इसलिए इस विषय पर विचार करने की आवश्यकता है।जयशंकर का यह बयान भारत में तेजी से वायरल हुआ और लोगों ने उनके स्पष्ट, आत्मविश्वासी और तथ्यों पर आधारित जवाब की जमकर सराहना की। सोशल मीडिया पर यह चर्चा आम हो गई कि भारत अब पश्चिमी देशों को उनकी ही भाषा में जवाब देने लगा है और वैश्विक दबावों के आगे झुकने के बजाय अपने हितों को प्राथमिकता दे रहा है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान भारत की नई कूटनीतिक रणनीति का प्रतीक है, जिसमें संतुलन, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं।
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