चंडीगढ़ 31 जनवरी 2026 (दैनिक खबरनामा ) चंडीगढ़ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में लुधियाना की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट द्वारा पारित उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें एक आरोपी को घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) करार दिया गया था। न्यायमूर्ति नीरजा के. काल्सन ने स्पष्ट कहा कि बिना आवश्यक कानूनी संतुष्टि और प्रक्रिया पूरी किए किसी व्यक्ति को घोषित अपराधी ठहराना कानूनन अस्वीकार्य है और यह व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर गंभीर प्रहार करता है।
हाईकोर्ट भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 528 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। यह याचिका उस आदेश को चुनौती देने के लिए दाखिल की गई थी, जो अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट), लुधियाना ने 12 अप्रैल 2021 को पारित किया था। यह मामला आईपीसी की धाराओं 363, 366-ए और पोक्सो एक्ट की धारा 12 के तहत दर्ज एफआईआर से जुड़ा था।एफआईआर पीड़िता के पिता की शिकायत पर दर्ज हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसकी नाबालिग बेटी का अपहरण कर उसे बहला-फुसलाकर ले जाया गया। वहीं, याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष दलील दी कि वह पीड़िता के साथ सहमति से संबंध में था और परिवार की आपत्ति के चलते युवती स्वयं घर छोड़कर उसके साथ गई थी।याचिकाकर्ता को पहले गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में उसे जमानत मिल गई। इसके बाद पीड़िता के पिता ने गुरुद्वारा साहिब में दोनों की शादी भी करवा दी। मामले में सत्र न्यायालय में आरोप तय हो चुके थे।
याचिकाकर्ता ने शादी के आधार पर एफआईआर रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था, जिस पर उसे अंतरिम संरक्षण भी मिला। हालांकि, वर्ष 2019 में यह संरक्षण यह कहकर वापस ले लिया गया कि याचिकाकर्ता विदेश चला गया है और उसकी ओर से कोई पेशी नहीं हो रही।साल 2024 में यह सामने आया कि याचिकाकर्ता को पहले ही घोषित अपराधी करार दिया जा चुका है, जिसके बाद उसने वर्तमान याचिका दाखिल की। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि वह अंतरिम राहत समाप्त होने की जानकारी के बिना अमेरिका चला गया था और मजबूरीवश परिवार से संपर्क में नहीं रह पाया।रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि ट्रायल कोर्ट ने यह कहीं दर्ज नहीं किया कि आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हुआ या स्वयं को छिपा रहा था, जो कि घोषणा जारी करने के लिए अनिवार्य शर्त है।न्यायालय ने कहा कि न तो गिरफ्तारी वारंट जारी होने के पर्याप्त साक्ष्य रिकॉर्ड पर हैं और न ही उनकी तामील न होने की कोई रिपोर्ट। इसके बावजूद सीधे तौर पर उद्घोषणा जारी कर दी गई, जो कि कानून की मूल प्रक्रिया के विरुद्ध है।हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि धारा 82/83 सीआरपीसी (अब बीएनएस) के तहत किसी को घोषित अपराधी बनाना एक गंभीर कदम है और इसमें सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य है। जल्दबाज़ी में पारित किया गया यह आदेश निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों के खिलाफ है।इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता स्वयं अदालत के समक्ष उपस्थित होने और प्रत्येक तारीख पर पेशी देने का आश्वासन दे रहा है, हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली।अदालत ने याचिकाकर्ता को दो सप्ताह के भीतर ट्रायल कोर्ट में पेश होकर जमानत के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया है। साथ ही ट्रायल कोर्ट को जमानत याचिका का शीघ्र निपटारा करने के आदेश दिए गए हैं।इससे पहले आदेश पारित करते हुए न्यायमूर्ति नीरजा के. काल्सन ने न्यायिक कार्यवाही में कागज़ की बचत को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि एक ही शीट पर आदेश प्रिंट कर कागज़ के सदुपयोग की मिसाल पेश की गई है, जिसे सभी अदालतों को अपनाना चाहिए।

Share to :
Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You May Also Like

मोहाली में वेरका की नई पहल: मोबाइल वैन से मिलेगा सस्ता खुला दूध, प्लास्टिक कचरा घटाने पर जोर

दैनिक खबरनामा। मोहाली, 7 जून 2026: पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और…
Share to :

बलटाना के वार्ड-4 में सड़क पर बना खतरनाक गड्ढा, स्थानीय निवासियों में चिंता

बरसात से पहले मरम्मत की मांग, पार्षद अल्का सैनी ने अधिकारियों से…
Share to :

विश्व साइकिल दिवस पर एमसीएम की साइकिल रैली, दिया हरित और स्वस्थ भविष्य का संदेश

दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 3 जून :  चंडीगढ़ के विश्व साइकिल दिवस 2026…
Share to :

एमसीएम ने सत्र 2026–27 के लिए कॉलेज एवं छात्रावास प्रॉस्पेक्टस जारी किए

दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 4 जून 2026: शैक्षणिक सत्र 2026–27 की प्रवेश प्रक्रिया…
Share to :