चंडीगढ़ 7 फरवरी 2026( दैनिक खबरनामा ) चंडीगढ़ हैजा का नाम सुनते ही लोग लंबे इलाज, भारी एंटीबायोटिक और उनके साइड इफेक्ट को लेकर परेशान हो जाते हैं। लेकिन अब इस गंभीर बीमारी के इलाज को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। चंडीगढ़ स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी (IMTECH) के वैज्ञानिकों ने नई रिसर्च में बताया है कि हैजा से लड़ाई अब सिर्फ ताकतवर एंटीबायोटिक तक सीमित नहीं रहेगी।IMTECH चंडीगढ़ और ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन बैक्टीरियल इंफेक्शंस, कोलकाता के वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया कि मानव आंत में मौजूद Paracoccus aminovorans नाम का बैक्टीरिया हैजा फैलाने वाले Vibrio cholerae को बढ़ने में मदद करता है। यह बैक्टीरिया बीमारी की गंभीरता बढ़ाने वाला एक साइलेंट फैक्टर बन सकता है।शोध के दौरान जब इस बैक्टीरिया पर L-Ascorbic Acid यानी विटामिन C का प्रभाव देखा गया, तो इसकी वृद्धि लगभग रुक गई। इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने प्रोबायोटिक बैक्टीरिया Weissella confusa पर भी प्रयोग किया। जब इसे Paracoccus aminovorans के साथ एक ही वातावरण में उगाया गया तो इस हानिकारक बैक्टीरिया की वृद्धि दब गई।
वैज्ञानिकों का कहना है कि हैजा के इलाज में अधिक एंटीबायोटिक उपयोग से एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में विटामिन C और प्रोबायोटिक आधारित उपाय सुरक्षित, किफायती और आसानी से उपलब्ध विकल्प बन सकते हैं। यह अध्ययन 2025 में वैज्ञानिक प्री-प्रिंट जर्नल bioRxiv में प्रकाशित हुआ है।