चंडीगढ़ 7 फरवरी 2026( जगदीश कुमार) चंडीगढ़ के पेरीफेरी क्षेत्रों में तेजी से फैल रहे अवैध निर्माण और उससे पर्यावरण को हो रहे नुकसान पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया है। एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच ने साफ कहा है कि पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।इस मामले में एनजीटी ने चंडीगढ़ प्रशासन और पंजाब सरकार से जवाब तलब करते हुए चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई 9 अप्रैल 2026 को होगी।सुनवाई एनजीटी के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल की पीठ ने की। पीठ ने कहा कि यदि निर्माण गतिविधियां पर्यावरणीय मानकों के खिलाफ पाई गईं तो जिम्मेदार अधिकारियों और विभागों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।याचिका काउंसिल ऑफ इंजीनियर्स व अन्य की ओर से दायर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि प्रशासनिक ढिलाई के चलते किशनगढ़, खुड्डा लाहौरा, कैंबावाला, खुड्डा जस्सू और पंजाब के मिर्जापुर, कांसल, नयागांव, करौरां, सिसवां, नाडा सहित कई इलाकों में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण हो रहा है।
याचिका में बताया गया कि कृषि भूमि पर बिना भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) के फार्म हाउस, गेस्ट हाउस, रेस्टोरेंट और नाइट क्लब तक संचालित किए जा रहे हैं। इससे भूजल दोहन, हरियाली कटान और जल निकासी बाधित होने जैसी गंभीर समस्याएं सामने आ रही हैं।विशेषज्ञों के अनुसार यदि समय रहते रोक नहीं लगी तो चंडीगढ़ की ग्रीन बेल्ट, वन भूमि और सुखना झील के कैचमेंट एरिया पर बड़ा खतरा खड़ा हो सकता है। एनजीटी की सख्ती के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि अवैध निर्माण पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।