चंडीगढ़ 24 फ़रवरी 2026(दैनिक खबरनामा ) चंडीगढ़ हाईकोर्ट पंजाब के स्कूलों और कॉलेजों में बढ़ती कथित अवैध “प्रधानी/प्रेसिडेंट” संस्कृति को लेकर दायर जनहित याचिका पर Punjab and Haryana High Court ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने पंजाब सरकार को याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए प्रतिनिधित्व पर दो माह के भीतर कानून के अनुसार निर्णय लेने का आदेश दिया है।यह जनहित याचिका Punjab Youth Congress के सचिव Angad Dutta की ओर से दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि राज्य के कई शैक्षणिक संस्थानों में बिना किसी वैधानिक चुनाव प्रक्रिया या प्रशासनिक अनुमति के स्वयंभू “प्रेसिडेंट” या “प्रधान” घोषित किए जा रहे हैं, जिससे कैंपस का माहौल प्रभावित हो रहा है।याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि इस प्रवृत्ति के कारण छात्रों के बीच गुटबाजी और टकराव की स्थिति बन रही है। नाबालिग छात्रों को भी शक्ति प्रदर्शन और रैलियों में शामिल किया जा रहा है, जिससे अनुशासन और शैक्षणिक वातावरण पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। साथ ही कानून-व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित होने की आशंका जताई गई।सुनवाई के दौरान कोर्ट को अवगत कराया गया कि 22 दिसंबर 2025 को संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में विस्तृत प्रतिनिधित्व भेजा गया था, लेकिन अब तक उस पर कोई ठोस कार्रवाई या निर्णय नहीं लिया गया। इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि राज्य सरकार दो माह के भीतर उक्त प्रतिनिधित्व पर कारणयुक्त (स्पीकिंग) आदेश पारित करे और उसकी प्रति याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराए।सुनवाई के बाद अंगद दत्ता ने कहा कि शैक्षणिक संस्थान राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का मंच नहीं बन सकते। यदि प्रशासन समय रहते कार्रवाई करता तो अदालत की शरण लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती। अब सबकी नजरें पंजाब सरकार के आगामी निर्णय और उठाए जाने वाले ठोस कदमों पर टिकी हैं।
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