दैनिक खबरनामा 26 मार्च 2026 बदलते युद्ध के स्वरूप को देखते हुए भारतीय सेना ने ड्रोन युद्ध क्षमता को तेजी से मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। वेस्टर्न कमांड के अंतर्गत अब हर रेजिमेंट में ड्रोन संचालन और ड्रोन वारफेयर में दक्ष विशेष टुकड़ियों का गठन किया जाएगा। इन टुकड़ियों को आधुनिक तकनीक के अनुरूप विशेष प्रशिक्षण देकर उन्हें अधिक प्रभावी और घातक बनाया जाएगा।सेना ने यह भी निर्णय लिया है कि ड्रोन निर्माण के साथ-साथ उसमें इस्तेमाल होने वाले हथियार और गोला-बारूद भी अपनी ही कार्यशालाओं में तैयार किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य स्वदेशी स्तर पर मजबूत ड्रोन इकोसिस्टम विकसित करना और विदेशी निर्भरता को कम करना है। वेस्टर्न कमांड इस मिशन पर मिशन मोड में काम कर रही है।रणनीति के तहत खड्गा कोर को ड्रोन हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही विभिन्न रेजिमेंटों में छोटी-छोटी विशेषज्ञ टुकड़ियां तैयार की जाएंगी, जो ड्रोन ऑपरेशन में महारत हासिल करेंगी और उन्हें एक अलग पहचान भी दी जाएगी।सेना की जरूरतों के अनुसार ड्रोन की डिजाइन, रेंज, पेलोड क्षमता और मिशन आधारित उपयोगिता तय की जा रही है। इन ड्रोन को यूनिट स्तर की कार्यशालाओं में तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया जा रहा है। खास बात यह है कि इनसे जुड़े हथियार और गोला-बारूद भी स्वदेशी रूप से विकसित किए जा रहे हैं।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक तनावों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक निर्णायक भूमिका निभाएंगे। ऐसे में भारतीय सेना का यह कदम न केवल रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि देश की रक्षा आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करेगा।