दैनिक खबरनामा 28 मार्च 2026 पंजाब में भ्रष्टाचार के एक बड़े मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपनी जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। सस्पेंड DIG हरचरण सिंह भुल्लर से जुड़े केस में अब कई IAS और IPS अधिकारियों की भूमिका सामने आने लगी है। CBI को जांच के दौरान अहम सबूत मिले हैं, जिसके आधार पर अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ प्रारंभिक जांच (प्रिलिमिनरी इंक्वायरी) शुरू कर दी गई है।CBI ने विशेष अदालत में अर्जी दाखिल कर मोबाइल फोन, मूल दस्तावेज और नकदी जब्त करने की अनुमति मांगी है। इससे पहले भुल्लर की जमानत याचिका हाईकोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी है और वह इस समय चंडीगढ़ की बुड़ैल जेल में बंद हैं।जांच एजेंसी के अनुसार यह मामला पिछले साल दर्ज भ्रष्टाचार केस से जुड़ा है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच, व्हाट्सएप चैट, पूछताछ और दस्तावेजों के विश्लेषण से कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क के प्रमाण मिले हैं। CBI का आरोप है कि आरोपी अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर निजी लोगों को फायदा पहुंचाने के बदले रिश्वत लेते थे।गौरतलब है कि 6 अक्टूबर 2025 को भुल्लर और बिचौलिए कृष्णु शारदा को गिरफ्तार किया गया था। छापेमारी के दौरान करीब 2 किलो सोना और साढ़े 7 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे।CBI कोर्ट ने 13 मार्च को इस मामले में संज्ञान लेते हुए ट्रायल प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे। वहीं, केंद्र सरकार से भी भुल्लर के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी मिल चुकी है।सूत्रों के मुताबिक पूछताछ के दौरान भुल्लर ने 14 अधिकारियों के नाम उजागर किए, जिनमें 10 IPS और 4 IAS अधिकारी शामिल हैं। इनमें से अधिकांश अधिकारी अभी भी अहम पदों पर तैनात हैं। इसके अलावा बिचौलिए कृष्णु शारदा के मोबाइल डेटा से करीब 50 अधिकारियों के साथ संदिग्ध संपर्क सामने आए हैं।
CBI की जांच में यह भी सामने आया है कि ये नेटवर्क ट्रांसफर-पोस्टिंग, आर्म्स लाइसेंस, FIR दर्ज कराने या रद्द करवाने जैसे कामों को प्रभावित करता था। फिलहाल एजेंसी पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है, जिससे आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।