दैनिक खबरनामा 30 अप्रैल 2026 पंजाब में न्यायिक अधिकारियों के आवास और अदालतों के बुनियादी ढांचे की कमी को लेकर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। सुनवाई के दौरान खुलासा हुआ कि राज्य में लगभग 60 प्रतिशत जज किराए के मकानों में रह रहे हैं। कई जिलों में जिला एवं सत्र न्यायाधीश तक को निजी मकानों में रहना पड़ रहा है।हाईकोर्ट ने इस स्थिति को न्यायिक स्वतंत्रता और गरिमा के लिए गंभीर खतरा बताया। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर किसी जज का मकान मालिक ही अदालत में याचिकाकर्ता बन जाए, तो यह स्थिति बेहद असहज और संवेदनशील हो सकती है। सुनवाई के दौरान मोहाली की एक ऐसी घटना का भी जिक्र किया गया, जहां जज और मकान मालिक एक ही भवन में अलग-अलग मंजिलों पर रह रहे थे।मामले में यह भी सामने आया कि कई जिलों में न्यायिक आवास निर्माण की योजनाएं वर्षों से लंबित हैं। मोगा में 1995 से आवास की जरूरत बताई जा रही थी, लेकिन जमीन का अधिग्रहण 2015 में हो पाया। मोहाली में भी करीब 20 साल की देरी हुई, जबकि पठानकोट में जमीन संरक्षित वन क्षेत्र निकलने के कारण मामला अटक गया।हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को निर्देश दिए हैं कि मोगा, पठानकोट और एसएएस नगर की स्थिति पर ताजा स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाए। साथ ही मुख्य सचिव से देरी के कारणों पर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है।