चंडीगढ़ 20 मार्च 2026(दैनिक खबरनामा ) चंडीगढ़ शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के सामने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़ी सियासी चुनौती खड़ी हो गई है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के अकेले चुनाव लड़ने के संकेत के बाद भाजपा के साथ गठबंधन की संभावनाएं कमजोर पड़ती दिख रही हैं।साल 1997 से 2022 तक शिअद ने ज्यादातर चुनाव गठबंधन के साथ ही लड़े और तीन बार सरकार भी बनाई। पार्टी इस बार भी गठबंधन चाहती थी और अपने पुराने सहयोगी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से हाथ मिलाने की कोशिश कर रही थी। हालांकि सीट बंटवारे और मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों दलों के बीच सहमति नहीं बन पाई।मोगा रैली में अमित शाह के बयान के बाद अब शिअद नए राजनीतिक विकल्प तलाशने में जुट गया है। पार्टी के भीतर भी यह समझ बन रही है कि गिरते जनाधार को संभालने के लिए मजबूत सहयोगी जरूरी है।शिअद जहां अपने पारंपरिक पंथक वोट बैंक और ग्रामीण इलाकों पर फोकस बढ़ा रहा है, वहीं दलित वोट बैंक को साधने की रणनीति भी तैयार की जा रही है। पिछले चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ गठबंधन का खास फायदा नहीं मिला, लेकिन इस बार भी बसपा को साथ लेने की संभावनाएं बनी हुई हैं।इतिहास पर नजर डालें तो भाजपा के साथ गठबंधन शिअद के लिए फायदेमंद रहा है। 1997, 2007 और 2012 में दोनों दलों ने मिलकर सरकार बनाई थी। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले गठबंधन का गणित बिगड़ना शिअद के लिए बड़ी सियासी चुनौती बन गया है।
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