टिकाऊ, सुरक्षित और कम लागत वाले पॉलिमर नोटों के परीक्षण की तैयारी, वर्षों पुरानी योजना फिर चर्चा में

दैनिक खबरनामा | नई दिल्ली, 30 मई : देश की मुद्रा व्यवस्था में जल्द एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) पॉलिमर यानी प्लास्टिक आधारित बैंक नोटों को चलन में लाने की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यदि यह योजना अमल में आती है तो भारतीय करेंसी के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण परिवर्तन माना जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, आरबीआई की हालिया बैठकों में प्लास्टिक नोटों से जुड़े प्रस्ताव पर चर्चा हुई है। माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक जल्द ही इस दिशा में पायलट परियोजना या परीक्षण कार्यक्रम की घोषणा कर सकता है।

पहले भी हो चुका है प्रयास

पॉलिमर नोटों का विचार नया नहीं है। करीब डेढ़ दशक पहले भी देश के कुछ शहरों में सीमित स्तर पर ऐसे नोटों के परीक्षण की योजना बनाई गई थी। हालांकि उस समय तकनीकी और संचालन संबंधी चुनौतियों के कारण परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब माना जा रहा है कि अधिकांश बाधाओं का समाधान कर लिया गया है और नई तकनीकों के साथ इस योजना को फिर से गति दी जा रही है।

क्यों बढ़ी प्लास्टिक नोटों की जरूरत?

हर साल बड़ी संख्या में कागजी नोट खराब होकर चलन से बाहर हो जाते हैं। इनकी जगह नए नोट छापने में भारी खर्च आता है। नोटों की बढ़ती मांग और बार-बार पुनर्मुद्रण की आवश्यकता के कारण मुद्रा छपाई पर होने वाला व्यय लगातार बढ़ता रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पॉलिमर नोट लंबे समय तक टिकाऊ रहते हैं, जिससे उन्हें बार-बार बदलने की आवश्यकता कम पड़ती है। इससे मुद्रा छपाई और वितरण पर होने वाला खर्च भी घट सकता है।

पॉलिमर नोटों की प्रमुख विशेषताएं

– विशेष प्रकार की लचीली प्लास्टिक सामग्री पर तैयार किए जाते हैं।
– सामान्य कागजी नोटों की तुलना में अधिक मजबूत और टिकाऊ होते हैं।
– नमी, धूल और गंदगी का इन पर कम प्रभाव पड़ता है।
– आसानी से फटते नहीं हैं और लंबे समय तक उपयोग में रह सकते हैं।
– वजन में हल्के होने के बावजूद दैनिक लेनदेन के लिए पूरी तरह उपयुक्त होते हैं।
– इनमें उन्नत सुरक्षा फीचर जोड़े जा सकते हैं, जिससे नकली नोट बनाना कठिन हो जाता है।
– विशेष होलोग्राम, पारदर्शी खिड़कियां और आधुनिक सुरक्षा तकनीकें इनकी सुरक्षा को और मजबूत बनाती हैं।

दुनिया के कई देशों में पहले से चलन

ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और कई अन्य देशों में पॉलिमर नोट सफलतापूर्वक उपयोग किए जा रहे हैं। इन देशों के अनुभवों से यह साबित हुआ है कि ऐसे नोट लंबे समय तक चलते हैं और नकली मुद्रा पर नियंत्रण में भी मददगार साबित होते हैं।

यदि आरबीआई इस योजना को अंतिम मंजूरी देता है, तो आने वाले समय में भारतीय नागरिकों के हाथों में पारंपरिक कागजी नोटों की जगह आधुनिक और अधिक सुरक्षित प्लास्टिक नोट दिखाई दे सकते हैं।

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