दैनिक खबरनामा। जम्मू, 15 जून : भारत-तिब्बत सहयोग मंच ने भारत और तिब्बत के बीच सांस्कृतिक, शैक्षणिक और सामाजिक संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए हिमाचल प्रदेश में व्यापक जनसंपर्क एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किए। मंच के बौद्धिक प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय सह-संयोजक तथा जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. विवेक शर्मा और संगठन के उपाध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने इस दौरान विभिन्न विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों और तिब्बती समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात की।

दौरे के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षकों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और बुद्धिजीवियों के साथ कई बैठकों में हिस्सा लिया। इन चर्चाओं में तिब्बती मुद्दे के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने, युवाओं में राष्ट्रीय चेतना को प्रोत्साहित करने तथा हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में मंच की गतिविधियों के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। बैठकों में सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला और केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के शिक्षाविदों ने भाग लिया।

प्रतिनिधिमंडल ने हमीरपुर जिले के नेरी, धर्मशाला स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर तथा मैक्लोडगंज का भी दौरा किया। मैक्लोडगंज में निर्वासित तिब्बती समुदाय और केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक को दौरे की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने तिब्बती वित्त मंत्री त्सेरिंग धुंडुप, तिब्बती संसद-इन-एग्जाइल के सदस्यों, शिक्षा सचिव और केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर तिब्बती समुदाय की वर्तमान परिस्थितियों, उनकी सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान के संरक्षण की चुनौतियों तथा तिब्बती मुद्दे के प्रति वैश्विक समर्थन और जागरूकता की आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की।

बैठकों में भारत और तिब्बत के लोगों के बीच आपसी समझ, सहयोग और एकजुटता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। साथ ही छात्रों, शोधार्थियों और नागरिक समाज के बीच तिब्बती मुद्दे के मानवीय, सांस्कृतिक और भू-राजनीतिक पहलुओं पर जागरूकता बढ़ाने के लिए भविष्य में संयुक्त कार्यक्रम आयोजित करने पर सहमति बनी।

विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और शोधार्थियों के साथ हुई चर्चाओं में संगठनात्मक नेटवर्क को सशक्त बनाने, छात्र एवं बौद्धिक मंचों के गठन तथा भारत-तिब्बत संबंधों और भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों पर शैक्षणिक समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।

डॉ. विवेक शर्मा और डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों को रचनात्मक संवाद और जागरूकता अभियानों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। इससे विद्यार्थियों में तिब्बत के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामरिक महत्व की गहरी समझ विकसित होगी तथा भारत-तिब्बत संबंधों को नई दिशा मिलेगी।

दौरे के दौरान केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश के डॉ. जगदीश परशाद, डॉ. अजय शर्मा, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. श्वेता शर्मा और डॉ. थुकतान नेगी, सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी के डॉ. राकेश शर्मा तथा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के डॉ. अंकुश भारद्वाज और डॉ. सनी कुमार सहित कई शिक्षाविद और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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