दैनिक खबरनामा। जम्मू, 11 जून: सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) की श्रीनगर पीठ ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के तहत निदेशालय स्वास्थ्य सेवाएं कश्मीर को वर्ष 2003 के सिविल कोर्ट के डिक्री आदेश का पालन न करने पर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रिब्यूनल ने विभाग को निर्देश दिया है कि आठ सप्ताह के भीतर आदेश का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए, अन्यथा आवेदक को एक लाख रुपये का मुआवजा अदा करना होगा।
मामला आवेदक इकबाल अहमद बकाल के अगस्त 1998 से लंबित वेतन और उससे जुड़े सेवा लाभों से संबंधित है। आवेदक की ओर से पेश अधिवक्ता ने ट्रिब्यूनल को बताया कि 5 जून 2003 को सिविल कोर्ट द्वारा पारित डिक्री को विभाग ने विभिन्न न्यायिक मंचों पर चुनौती दी, लेकिन हर स्तर पर उसे असफलता का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद पिछले दो दशकों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आदेश का पूर्ण पालन नहीं किया गया।
CAT ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केवल आवेदक को दोबारा ड्यूटी ज्वाइन करने की अनुमति देना डिक्री के अनुपालन के बराबर नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि वेतन भुगतान और अनुपस्थिति की अवधि के निर्धारण से जुड़े निर्देश अब भी लंबित हैं, इसलिए विभाग की कार्रवाई अधूरी है।
ट्रिब्यूनल ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि डिक्री के अनुरूप अगस्त 1998 से आवेदक का बकाया वेतन जारी किया जाए। साथ ही, उसकी अनुपस्थिति की अवधि को लेकर आवश्यक जांच कर उसे अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाए। जांच पूरी होने के बाद वेतन और अन्य सेवा लाभों की पात्रता के संबंध में विधिवत आदेश जारी किया जाए।
CAT ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से आठ सप्ताह के भीतर पूरी की जानी चाहिए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समयसीमा में आदेश का पालन नहीं किया गया, तो विभाग को आवेदक के पक्ष में एक लाख रुपये की लागत (मुआवजा) का भुगतान करना होगा।