दैनिक खबरनामा। चंडीगढ़, 13 जुलाई: चंडीगढ़ प्रशासन सेक्टर-39 में प्रस्तावित नई अनाज मंडी के निर्माण को अब अंतिम चरण में ले जाने की तैयारी में है। इस महीने के भीतर इस 200 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना को पर्यावरण विभाग से हरी झंडी मिलने की संभावना जताई जा रही है। मंजूरी मिलते ही निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इसके साथ ही दूसरे चरण में मंडी के भूखंडों की नीलामी भी आरंभ होगी।
अधिकारियों के अनुसार, मंडी की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। इंजीनियरिंग विभाग ने भी डीपीआर पर अपनी सहमति दे दी है। प्रशासन का लक्ष्य है कि वर्ष 2025 के अंत तक सेक्टर-26 स्थित मौजूदा मंडी को चरणबद्ध तरीके सेक्टर-39 में स्थानांतरित करने का काम शुरू कर दिया जाए।
लोन के बजाय नीलामी से जुटेगा पैसा
कृषि विभाग का जोर इस बात पर है कि निर्माण के लिए अलग से कर्ज न लिया जाए। इसके लिए मंडी के प्लाटों की नीलामी से होने वाली आय को सीधे निर्माण कार्य में लगाया जाएगा। इस पूरी योजना की निगरानी कृषि विभाग के सचिव डी. कार्तिकेयन कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में हर सप्ताह समीक्षा बैठक हो रही है और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इस प्रोजेक्ट को सर्वोच्च प्राथमिकता पर पूरा किया जाए।
जमीन 1990 में 3 करोड़ में मिली थी
सेक्टर-39 में मंडी के लिए आरक्षित 75 एकड़ जमीन मंडी बोर्ड को प्रशासन से 1990 में महज 3 करोड़ रुपये में आवंटित हुई थी। नई मंडी की कुल अनुमानित लागत 185 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें राज्य कृषि विपणन बोर्ड के मुख्यालय भवन पर करीब 13.50 करोड़ और मार्केट कमेटी के कार्यालय पर लगभग 9.60 करोड़ रुपये खर्च होंगे। परियोजना के तहत यहां दो कोल्ड स्टोरेज भी बनाए जाएंगे।
इस रिपोर्ट को नेबकन कंपनी ने तैयार किया है। कृषि विभाग ने कंपनी से लागत घटाने का अनुरोध किया था, लेकिन अध्ययन के बाद कंपनी ने कहा कि मौजूदा दरों में कटौती संभव नहीं है। गौरतलब है कि 22 मार्च 2019 को इस योजना की लागत 155.79 करोड़ रुपये थी। काम में देरी के कारण मार्च 2022 तक यह 24 प्रतिशत बढ़कर लगभग 185 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
दूसरे चरण की नीलामी अगले महीने
अब तक प्रशासन पहले चरण में 12 प्लाटों की नीलामी कर चुका है। अगले महीने दूसरे चरण की नीलामी होगी। इस बार आढ़तियों को कोई विशेष छूट नहीं दी जाएगी। नए कलेक्टर रेट लागू होने के बाद शोरूम के लिए आरक्षित प्लाटों की आरक्षित कीमत 3.70 करोड़ से बढ़कर 5.40 करोड़ रुपये हो गई है।
प्रशासन ने कुल 92 प्लाट नीलाम करने की योजना बनाई है। नीलामी में दूसरे राज्यों के व्यापारी और स्थानीय आढ़ती दोनों हिस्सा ले सकेंगे।