हंगरी की सत्ता गंवाने के बाद भी पार्टी ने जताया भरोसा, ओर्बान ने कहा- “मैं कभी हार नहीं मानूंगा”
दैनिक खबरनामा ब्यूरो। बुडापेस्ट, 13 जून : हंगरी की प्रमुख विपक्षी पार्टी फिदेस्ज़ ने शनिवार को पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान को एक वर्ष के लिए फिर से अपना नेता चुन लिया। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब 12 अप्रैल को हुए चुनाव में पार्टी को सत्ता से बाहर होना पड़ा था और केंद्र-दक्षिणपंथी तिस्ज़ा पार्टीने जीत हासिल की थी।
62 वर्षीय राष्ट्रवादी नेता ओर्बान को यूरोप और अमेरिका के दक्षिणपंथी रूढ़िवादी नेताओं के लिए प्रेरणा स्रोत माना जाता है। उन्होंने जिस शासन व्यवस्था को बढ़ावा दिया, उसे उन्होंने स्वयं “अउदारवादी लोकतंत्र” का नाम दिया था।
चुनावी हार के बाद ओर्बान के राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठने लगे थे। उनकी पार्टी के कुछ पुराने समर्थकों और वफादार सहयोगियों ने उनसे राजनीति से संन्यास लेने का दबाव भी बनाया था। वर्ष 2010 में सत्ता में आने के बाद यह पहला अवसर था जब उन्हें अपनी ही पार्टी के भीतर से खुली आलोचना का सामना करना पड़ा।
सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, फिदेस्ज़ के पार्टी अधिवेशन में कुल 737 प्रतिनिधियों में से 729 ने ओर्बान के पक्ष में मतदान किया। उनके खिलाफ कोई भी प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार मैदान में नहीं था।
मतदान से पहले अपने संबोधन में ओर्बान ने कहा, “मैं हार नहीं मानता। मैं कभी, कभी, कभी, कभी और कभी हार नहीं मानूंगा।” उन्होंने पार्टी की चुनावी पराजय की पूरी जिम्मेदारी भी स्वीकार की।
ओर्बान ने कहा कि फिदेस्ज़ पिछले 16 वर्षों तक एक “शानदार शासन करने वाली पार्टी” रही है, लेकिन अब उसे बदलाव की आवश्यकता है ताकि वह एक प्रभावी विपक्षी दल के रूप में काम कर सके और भविष्य में दोबारा शासन करने के लिए तैयार हो सके।
अप्रैल में हुए चुनाव में प्रधानमंत्री पीटर माज्यार की तिस्ज़ा पार्टी ने संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल किया था। यह बहुमत इतना बड़ा है कि नई सरकार ओर्बान द्वारा किए गए संवैधानिक संशोधनों को भी पलट सकती है।
जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार चुनाव के बाद से फिदेस्ज़ का जनसमर्थन लगातार घट रहा है। मई में किए गए एक सर्वेक्षण में तिस्ज़ा पार्टी को 55 प्रतिशत समर्थन मिला, जो चुनाव में प्राप्त 53 प्रतिशत समर्थन से अधिक है। वहीं फिदेस्ज़ का समर्थन घटकर 17 प्रतिशत रह गया, जबकि चुनाव के समय उसे 39 प्रतिशत समर्थन प्राप्त था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी नेतृत्व में ओर्बान की वापसी यह दर्शाती है कि फिदेस्ज़ अभी भी उनके नेतृत्व पर भरोसा करती है, लेकिन जनता का खोया विश्वास वापस हासिल करना पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।