दैनिक खबरनामा। बसोहली, 18 अगस्त: विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच कठुआ जिले के दूरदराज इलाके में बुनियादी सुविधा आज भी संघर्ष का सबब बनी हुई है। बसोहली क्षेत्र की शाहरा-माश्का सड़क पिछले करीब दो महीने से बंद पड़ी है, जिससे आसपास के गांवों का जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है।
इस बंदी की सबसे दर्दनाक तस्वीर सलोवा गांव से सामने आई। यहां करीब 50 वर्षीय एक महिला के बीमार पड़ने पर उसे इलाज के लिए सड़क तक लाना जरूरी था, लेकिन वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका। मजबूरी में ग्रामीणों ने पालकी का इंतजाम किया और महिला को कंधों पर उठाकर लगभग 8 किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक पहुंचाया।
प्रशासन और ठेकेदार पर सवाल
स्थानीय लोग बताते हैं कि दो महीने बीत जाने के बाद भी संबंधित विभाग ने सड़क को आवाजाही लायक बनाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस ठेकेदार को काम सौंपा गया है, उसने भी सड़क बहाल करने में रुचि नहीं दिखाई।
लोग पूछ रहे हैं कि जब मार्ग इतने लंबे समय से ठप है तो जिम्मेदार विभाग और ठेकेदार पर कार्रवाई के लिए दबाव क्यों नहीं बनाया जा रहा। उनके मुताबिक इस बंदी की सबसे ज्यादा मार उन परिवारों पर पड़ी है जिनके लिए यही सड़क रोजमर्रा के आवागमन का एकमात्र जरिया है।
पढ़ाई और रोजमर्रा पर असर
सड़क बंद होने से स्कूली बच्चों और छात्राओं की पढ़ाई भी बाधित हुई है। गांव के विद्यार्थियों को हाई स्कूल, सांदर, शीतल नगर स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल और बसोहली डिग्री कॉलेज जाने के लिए हर दिन कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ रहा है।
बारिश के मौसम में दिक्कतें और बढ़ जाती हैं। कीचड़, फिसलन और टूटे-फूटे रास्तों की वजह से महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सुरक्षित तरीके से भी नहीं चल पाते। समय पर स्कूल-कॉलेज पहुंचने के लिए बच्चों को घर से काफी पहले निकलना पड़ता है।
बीमारों और बुजुर्गों की सबसे बड़ी मुश्किल
ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है। एंबुलेंस या कोई अन्य वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाता, इसलिए बीमार और बुजुर्ग लोगों को पालकी या वैकल्पिक तरीकों से सड़क तक लाना पड़ता है। सलोवा की महिला को 8 किमी तक पालकी में ले जाने की घटना इसी लाचारी को दर्शाती है। लोगों का कहना है कि समय पर अस्पताल न पहुंच पाना किसी की जान पर भी बन सकती है।
अब और बर्दाश्त नहीं
स्थानीय निवासी कृष्ण चंद, दीवान चंद, हट्ट गांव के पूर्व सरपंच सुरेंद्र सिंह और शिव कुमार मखोत्रा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि देश जब आजादी की 80वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है, तब भी उनके गांवों को सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए जूझना पड़ रहा है।
उन्होंने मांग की कि शाहरा-माश्का मार्ग को तुरंत युद्धस्तर पर ठीक कर यातायात के लिए खोला जाए। साथ ही सड़क बंद रहने के कारणों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई हो। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो उनका विरोध और तेज होगा।
फिलहाल एक बीमार महिला को पालकी में 8 किलोमीटर तक ले जाने की यह घटना इस क्षेत्र में सड़क व्यवस्था की बदहाली और लोगों की मजबूरी को साफ दिखा रही है।