दैनिक खबरनामा | 17 अगस्त | नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजमार्गों पर मौजूद टोल प्लाजा की भूमिका अब सिर्फ टोल टैक्स वसूलने तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार FASTag और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों से जुटाई जाने वाली वाहन संबंधी जानकारी का इस्तेमाल अपराध और सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए करने की तैयारी में है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस संबंध में नए दिशानिर्देश जारी किए हैं।

नई व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), पुलिस सहित अन्य अधिकृत सुरक्षा और जांच एजेंसियों को आवश्यकता के अनुसार टोल प्लाजा से संबंधित वाहन डेटा तक नियंत्रित पहुंच मिल सकेगी। किसी संदिग्ध या ब्लैकलिस्टेड वाहन के टोल प्लाजा से गुजरने पर संबंधित एजेंसियों को रियल-टाइम अलर्ट मिलने की व्यवस्था की जा सकती है।

आतंकी गतिविधियों पर भी निगरानी

सुरक्षा के लिहाज से इस प्रणाली को अहम माना जा रहा है। पूर्व में आतंकी घटनाओं में कार, ट्रक, वैन और मोटरसाइकिल जैसे वाहनों का इस्तेमाल विस्फोटक ले जाने अथवा वाहनजनित आईईडी के तौर पर किया जाता रहा है। ऐसे में टोल प्लाजा से मिलने वाले डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए संदिग्ध वाहनों की आवाजाही पर नजर रखना आसान होगा। किसी वारदात के बाद जांच एजेंसियां संबंधित वाहन के संभावित रास्ते का भी पता लगा सकेंगी।

हिट एंड रन की जांच में मिलेगी मदद

नई तकनीक सड़क दुर्घटनाओं के बाद फरार होने वाले वाहनों की पहचान में भी उपयोगी साबित हो सकती है। दुर्घटनास्थल के आसपास स्थित टोल प्लाजा के टाइम-स्टैम्प और वाहन संबंधी रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस संदिग्ध वाहन के मूवमेंट का रूट तैयार कर सकेगी। इससे हिट एंड रन के मामलों में आरोपी वाहन तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा लूट, डकैती, अपहरण और हथियारों की तस्करी जैसे गंभीर अपराधों की जांच में भी टोल डेटा महत्वपूर्ण सुराग उपलब्ध करा सकता है।

फर्जी नंबर प्लेट और क्लोन FASTag की होगी पहचान

देश में चोरी किए गए वाहनों को अक्सर दूसरे राज्यों या सीमावर्ती इलाकों में ले जाया जाता है। पहचान छिपाने के लिए अपराधी फर्जी नंबर प्लेट अथवा क्लोन FASTag का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

ANPR कैमरों की मदद से वाहन की नंबर प्लेट पढ़ने के साथ उसके रंग, कंपनी और मॉडल जैसे विवरणों का मिलान किया जा सकेगा। यदि FASTag में दर्ज जानकारी और कैमरे के जरिए सामने आए वास्तविक वाहन के विवरण में विसंगति मिलती है, तो वाहन को संदिग्ध मानकर आगे की कार्रवाई की जा सकेगी।

डेटा तक पहुंच रहेगी सीमित

सरकार ने वाहन डेटा की सुरक्षा और लोगों की निजता को ध्यान में रखते हुए इसकी पहुंच नियंत्रित रखने का प्रावधान किया है। जानकारी केवल अधिकृत एजेंसियों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराई जाएगी।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और परिवहन विभाग जैसी एजेंसियां आवश्यकता के अनुसार संबंधित डेटा मांग सकेंगी। इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया निर्धारित की गई है और वरिष्ठ अधिकारियों के अनुरोध के आधार पर ही जानकारी साझा की जाएगी। आम नागरिकों के लिए यह डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

इस व्यवस्था के लागू होने के बाद राष्ट्रीय राजमार्गों का टोल नेटवर्क केवल शुल्क संग्रह का माध्यम न रहकर वाहन निगरानी, अपराध नियंत्रण और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े डिजिटल तंत्र के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

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