दैनिक खबरनामा। किश्तवाड़/डोडा, 7 जुलाई: जम्मू संभाग के पहाड़ी जिलों में बीते रविवार रात आई प्राकृतिक आपदा ने भारी नुकसान पहुंचाया है। डोडा और किश्तवाड़ में अचानक बादल फटने के बाद आए मलबे और कीचड़ के सैलाब ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया।
जानकारी के अनुसार डोडा जिले में हो रहे भूस्खलन के बाद प्रशासन ने राहत और बचाव का काम शुरू कर दिया है। रविवार रात डोडा और किश्तवाड़ में बादल फटने से पहाड़ों से भारी मात्रा में पत्थर, कीचड़ और मलबा नीचे आया। इसका सबसे ज्यादा असर किश्तवाड़ में बन रही क्वार जल विद्युत परियोजना के आसपास दिखा। यहां 540 मेगावाट की निर्माणाधीन परियोजना के टनल क्षेत्र के पास खड़े ट्रक, डोजर और अन्य मशीनरी मलबे में दब गईं।

राहत की बात यह रही कि हादसे के वक्त परियोजना स्थल पर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। इस कारण किसी की जान नहीं गई। इसकी पुष्टि केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी की है।
मंगलवार को भी हालात सामान्य नहीं हो सके। डोडा-किश्तवाड़ को जोड़ने वाला नेशनल हाईवे 244 मलबा जमा होने के कारण बंद है। सड़क पर जगह-जगह चट्टानें और कीचड़ आने से यातायात पूरी तरह रुका हुआ है, जिसके चलते बड़ी संख्या में यात्री बीच रास्ते में फंस गए हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे फिलहाल इस मार्ग से सफर न करें और यातायात विभाग की सलाह मानें।
अधिकारी मौके पर पहुंचकर सड़क से मलबा हटाने और मार्ग बहाल करने में जुटे हैं। सोमवार को मौसम साफ रहने से काम में थोड़ी तेजी आई। भारी बारिश की वजह से निर्माण सामग्री को भी नुकसान पहुंचा है।
डोडा जिले के प्रेम नगर के ऊपरी क्षेत्र में भी बादल फटने से स्थिति गंभीर बनी। यहां बाजार में बाढ़ जैसी हालत बन गई। नाले में तेज बहाव और मलबा आने से निचले इलाकों के कुछ मकान और एक मंदिर क्षतिग्रस्त हो गए। यहां भी कई वाहन मलबे में दबे बताए जा रहे हैं।
उधर रियासी जिले के ऊंचाई वाले हिस्सों से भी बाढ़ की सूचना मिली है। चिनैनी के पास बप्प गांव के निकट लगातार बारिश के कारण मानतलाई-लाटी सड़क का एक हिस्सा धंस गया। इससे यह मार्ग भी बंद हो गया है।
फिलहाल प्रशासन का फोकस फंसे वाहनों को निकालने और प्रभावित जगहों से मलबा हटाने पर है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और अन्य इलाकों से अभी किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।