दैनिक खबरनामा । श्रीनगर, 18 जून : जम्मू-कश्मीर विधानसभा की पर्यावरण समिति ने प्रदेश में बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण पर गंभीर चिंता जताते हुए पूरे केंद्र शासित प्रदेश में प्लास्टिक, विशेषकर सिंगल-यूज प्लास्टिक, पर व्यापक प्रतिबंध लगाने की मांग की है। समिति ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो नदियों, झीलों और अन्य पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है।
विधायक एम.वाई. तारीगामी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में प्लास्टिक कचरे को जम्मू-कश्मीर के सामने मौजूद सबसे बड़े पर्यावरणीय खतरों में से एक बताया गया। समिति ने कहा कि प्लास्टिक का अनियंत्रित उपयोग जल स्रोतों को प्रदूषित कर रहा है, जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है और प्रदेश के नाजुक पारिस्थितिक संतुलन को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है।
बैठक में तारीगामी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से पूरे जम्मू-कश्मीर में प्लास्टिक के उपयोग पर व्यापक प्रतिबंध लगाने के लिए कार्यकारी आदेश जारी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अब आधे-अधूरे उपायों का समय समाप्त हो चुका है और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है।
समिति ने जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति (JKPCC) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और सिंगल-यूज प्लास्टिक प्रतिबंध संबंधी कानूनों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए। पर्यटन स्थलों, धार्मिक परिसरों और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में प्लास्टिक के बढ़ते इस्तेमाल पर विशेष चिंता व्यक्त की गई।
समिति ने स्पष्ट किया कि केवल आदेश जारी करने से जम्मू-कश्मीर प्लास्टिक मुक्त नहीं होगा। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण समिति, श्रीनगर नगर निगम और जम्मू नगर निगम के बीच समन्वित एवं जवाबदेह कार्रवाई जरूरी है। साथ ही सरकारी कार्यालयों, बैठकों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्लास्टिक के उपयोग को तत्काल बंद करने की सिफारिश भी की गई।
बैठक में सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। समिति ने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो शहरी क्षेत्रों की स्वच्छता व्यवस्था गंभीर संकट में पड़ सकती है। आवास एवं शहरी विकास विभाग को आंदोलनरत कर्मचारियों से तत्काल वार्ता कर उनकी नियमितीकरण संबंधी मांगों पर सकारात्मक पहल करने के निर्देश दिए गए।
इसके अलावा समिति ने श्रीनगर के अच्छन लैंडफिल और जम्मू के भगवती नगर डंपिंग साइट की स्थिति पर भी चिंता जताई। पर्यावरणीय प्रभाव, पुराने कचरे के निस्तारण, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के अनुपालन को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तलब की गई है।
अंचार झील, तवी नदी, सुरंईसर झील और मानसर झील में बढ़ते प्रदूषण पर भी समिति ने चिंता व्यक्त की। तवी नदी में गिर रहे सीवेज और बिना उपचारित गंदे पानी की निकासी को रोकने के लिए चल रही परियोजनाओं की समीक्षा की गई तथा अधिकारियों को इन जल निकायों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए आवश्यक सुझाव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
समिति ने जम्मू नगर निगम से नगर क्षेत्र के तालाबों, झीलों और अन्य जल निकायों के संरक्षण, पुनर्जीवन और अतिक्रमण हटाने के प्रयासों की जानकारी भी मांगी। साथ ही वर्ष 2025 की सीएजी रिपोर्ट में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित टिप्पणियों को अगली बैठक में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
बैठक के अंत में समिति ने स्पष्ट संदेश दिया कि पर्यावरणीय मुद्दों पर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अध्यक्ष एम.वाई. तारीगामी ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने और अगली बैठक में विस्तृत कार्रवाई प्रतिवेदन (एटीआर) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। समिति ने संकेत दिया कि अपेक्षित सुधार नहीं होने पर संबंधित विभागों की जवाबदेही तय की जाएगी।