दैनिक खबरनामा | मुंबई, 1 जून : भारतीय शेयर बाजार के लिए जून का महीना इस बार कई चुनौतियों के साथ शुरू हो रहा है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की रुचि बनी रहने से इन वर्गों में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिल सकता है।
पिछले एक दशक के आंकड़ों पर नजर डालें तो जून का महीना भारतीय बाजारों के लिए अक्सर सकारात्मक रहा है। प्रमुख सूचकांकों ने अधिकांश वर्षों में बढ़त दर्ज की है, लेकिन इस बार परिस्थितियां कुछ अलग नजर आ रही हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
बड़े शेयरों पर दबाव, छोटे शेयरों में अवसर
विश्लेषकों के अनुसार, घरेलू निवेशकों का झुकाव अब केवल ब्लू-चिप कंपनियों तक सीमित नहीं है। निवेशक ऐसे क्षेत्रों और कंपनियों की तलाश में हैं जहां भविष्य में बेहतर वृद्धि की संभावना दिखाई दे रही है। यही कारण है कि मिडकैप और स्मॉलकैप श्रेणी के शेयर अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं।
मई महीने में जहां प्रमुख सूचकांकों में गिरावट देखने को मिली, वहीं कई मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने सकारात्मक रिटर्न दिया। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा इन वर्गों में लगातार बढ़ रहा है।
मानसून, तेल और वैश्विक घटनाक्रम पर नजर
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जून के दौरान कच्चे तेल की कीमतें, मानसून की प्रगति और पश्चिम एशिया में जारी तनाव निवेशकों की सोच को प्रभावित कर सकते हैं। यदि इन मोर्चों पर सकारात्मक संकेत मिलते हैं तो बाजार में फिर से तेजी लौट सकती है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि निवेशकों को केवल जून के प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय आने वाले महीनों की संभावनाओं को भी देखना चाहिए। ऐतिहासिक रूप से जुलाई का महीना भारतीय बाजारों के लिए अपेक्षाकृत बेहतर रहा है।
किन क्षेत्रों में दिख सकती है मजबूती?
विश्लेषकों के मुताबिक पूंजी बाजार, बिजली, ऊर्जा, ऑटो कंपोनेंट्स, बुनियादी ढांचा, पूंजीगत वस्तुएं तथा वायर एवं केबल से जुड़े क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन की संभावना बनी हुई है। इन क्षेत्रों में निवेशकों की रुचि बढ़ने से संबंधित कंपनियों के शेयरों को समर्थन मिल सकता है।
घरेलू निवेशकों की भूमिका बढ़ी
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम होने के कारण मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियां वैश्विक बिकवाली के दबाव से कुछ हद तक सुरक्षित हैं। घरेलू निवेशकों का लगातार निवेश इन शेयरों को मजबूती प्रदान कर रहा है।
कुल मिलाकर, जून में बाजार का रुख कई बाहरी कारकों पर निर्भर रहेगा, लेकिन निवेशकों की नजर अब उन कंपनियों पर है जो भविष्य में बेहतर विकास और लाभ की संभावनाएं रखती हैं। ऐसे में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर बाजार की कहानी के मुख्य किरदार बने रह सकते हैं।