दैनिक खबरनामा | 13 अगस्त | जालंधर: विदेश में रोजगार की तलाश में गए पंजाब के युवाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाने वाला मामला सामने आया है। जालंधर के फिल्लौर इलाके के गांव भैणी निवासी 30 वर्षीय राकेश कुमार का केन्या में एक आपराधिक गिरोह ने कथित तौर पर अपहरण कर लिया था। बदमाशों ने उसे बंधक बनाकर मारपीट की और रिहाई के बदले परिवार से 70 हजार अमेरिकी डॉलर यानी करीब 58 लाख रुपये की फिरौती मांगी। मामले में भारत सरकार और केन्याई प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद राकेश को सुरक्षित मुक्त करा लिया गया।
परिजनों को भेजा मारपीट का वीडियो
जानकारी के मुताबिक, राकेश कुमार रोजगार के सिलसिले में कुछ समय पहले केन्या गया था। वहां पहुंचने के बाद एक स्थानीय आपराधिक गिरोह ने कथित तौर पर उसे अपने कब्जे में ले लिया। आरोप है कि बदमाशों ने युवक के साथ बुरी तरह मारपीट की।
परिवार पर दबाव बनाने के लिए अपहरणकर्ताओं ने राकेश के साथ मारपीट का वीडियो व्हाट्सऐप के जरिए जालंधर में रह रहे उसके परिजनों को भेजा। वीडियो सामने आते ही परिवार में दहशत फैल गई और परिजन उसकी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हो गए।
70 हजार डॉलर की मांगी फिरौती
अपहरणकर्ताओं ने राकेश को छोड़ने के बदले 70 हजार अमेरिकी डॉलर की मांग रखी थी। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 58 लाख रुपये बैठती है। परिवार का कहना था कि इतनी बड़ी राशि जुटाना उनके लिए संभव नहीं था। इसके बाद उन्होंने पुलिस प्रशासन और सरकार से मदद की गुहार लगाई।
भारत और केन्या के अधिकारियों ने की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने कूटनीतिक माध्यमों से प्रयास शुरू किए। भारतीय अधिकारियों ने केन्याई प्रशासन के साथ संपर्क स्थापित किया और राकेश की सुरक्षित रिहाई के लिए कार्रवाई की। दोनों देशों के अधिकारियों के प्रयासों के बाद युवक को अपहरणकर्ताओं के चंगुल से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
राकेश के सुरक्षित होने की जानकारी मिलते ही परिवार ने राहत की सांस ली।
एजेंटों की भूमिका की जांच की मांग
राकेश की रिहाई के बाद उसके परिवार ने पंजाब पुलिस और राज्य सरकार से पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। परिजनों का आरोप है कि युवक को विदेश भेजने वाले एजेंटों ने उन्हें पूरी और सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई।
परिवार ने संबंधित ट्रैवल एजेंटों की भूमिका की जांच कर दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि विदेश में रोजगार दिलाने के नाम पर युवाओं और उनके परिवारों के साथ धोखाधड़ी करने वाले एजेंटों पर प्रभावी कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह की परेशानी न झेलनी पड़े।