दैनिक खबरनामा । शिमला, 24 जून : हिमाचल प्रदेश कांग्रेस ने लंबे समय से लंबित संगठनात्मक नियुक्तियों को अंतिम रूप देते हुए किन्नौर और शिमला ग्रामीण (संगठनात्मक जिला) में नए जिला अध्यक्षों की घोषणा कर दी है। पार्टी हाईकमान ने नेगी निगम भंडारी को जिला कांग्रेस कमेटी किन्नौर और ई. हरिकृष्ण हिमराल को शिमला ग्रामीण का अध्यक्ष नियुक्त किया है। दोनों नियुक्तियों को प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और संगठनात्मक संतुलन के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मंजूरी के बाद कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने नियुक्ति आदेश जारी किए। गौरतलब है कि 6 नवंबर 2024 को कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश, जिला और ब्लॉक स्तर की सभी संगठनात्मक इकाइयों को भंग कर दिया था। अधिकांश जिलों में नई नियुक्तियां पहले ही हो चुकी थीं, लेकिन किन्नौर और शिमला ग्रामीण में नेताओं के बीच सहमति न बनने के कारण मामला अटका हुआ था।
किन्नौर में युवा चेहरे पर दांव, मंत्री खेमे को अलग संदेश
किन्नौर जिला कांग्रेस की कमान युवा नेता नेगी निगम भंडारी को सौंपी गई है। भंडारी पूर्व में युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में राष्ट्रीय महासचिव के साथ-साथ कर्नाटक के प्रभारी की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्हें राहुल गांधी की टीम का करीबी सदस्य माना जाता है।
उनकी नियुक्ति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने जिला अध्यक्ष पद के लिए अन्य नामों की पैरवी की थी। इसके बावजूद हाईकमान ने युवा नेतृत्व को प्राथमिकता देते हुए निगम भंडारी पर भरोसा जताया है। राजनीतिक जानकार इसे किन्नौर कांग्रेस में नए शक्ति संतुलन के संकेत के रूप में देख रहे हैं। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भी किन्नौर सीट के टिकट को लेकर भंडारी का नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल रहा था।
शिमला ग्रामीण में हिमराल को मिली जिम्मेदारी
शिमला ग्रामीण संगठनात्मक जिला की कमान ई. हरिकृष्ण हिमराल को सौंपी गई है। हिमराल पार्टी संगठन में लंबे समय से सक्रिय हैं और कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। उन्हें पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर का करीबी माना जाता है।
शिमला ग्रामीण से भी कई नामों पर चर्चा चल रही थी, लेकिन अंततः हाईकमान ने हिमराल को संगठन की कमान सौंपकर अनुभव और संगठनात्मक क्षमता पर भरोसा जताया है।
नियुक्तियों के सियासी मायने
इन दोनों नियुक्तियों को कांग्रेस हाईकमान के स्पष्ट राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी ने संकेत दिया है कि संगठन में नियुक्तियां किसी एक नेता या गुट की पसंद के आधार पर नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन, संगठनात्मक मजबूती और भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखकर की जाएंगी।
आगामी विधानसभा चुनावों से पहले इन फैसलों को कांग्रेस के भीतर नए नेतृत्व को उभारने और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही, यह भी माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों से प्रदेश कांग्रेस में उभरते नए शक्ति केंद्रों की भूमिका और प्रभाव आने वाले समय में और स्पष्ट होगा।