दैनिक खबरनामा | लेह, 1 जून : केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में पर्यटन और राजस्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उपराज्यपाल प्रशासन ने नई उत्पाद शुल्क (एक्साइज) नीति लागू की है। नई नीति के तहत अब पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को भारत निर्मित विदेशी शराब (IMFL) उपलब्ध होगी। इसके साथ ही लाइसेंस प्राप्त गेस्ट हाउस और होमस्टे में भी शराब परोसने की अनुमति दी गई है।

उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना द्वारा घोषित नई नीति में शराब की उपलब्धता बढ़ाने के साथ-साथ अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। अब तक लद्दाख में केवल बीयर, वाइन और रेडी-टू-ड्रिंक पेय पदार्थों की बिक्री की अनुमति थी तथा शराब का सेवन मुख्य रूप से होटल परिसरों तक सीमित था।

20 नई शराब दुकानों की होगी नीलामी
वर्तमान में लद्दाख में बीयर और वाइन की केवल दो अधिकृत दुकानें संचालित हैं। नई नीति के तहत दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 20 नई शराब दुकानों के लाइसेंस नीलामी के माध्यम से जारी किए जाएंगे। लाइसेंस प्राप्त करने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की संख्या 16 से घटाकर केवल 6 कर दी गई है, जबकि जिला प्रशासन की पूर्व अनुमति की अनिवार्यता भी समाप्त कर दी गई है।

विशेष आयोजनों में शराब परोसने की अनुमति
अब निर्धारित शुल्क जमा कर निजी समारोहों, भोजगृहों और पार्टी हॉलों में भी शराब परोसने की अनुमति प्राप्त की जा सकेगी। पहले ऐसी व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी। साथ ही शराब निर्माताओं को थोक वितरण की अनुमति देकर गुणवत्ता वाले ब्रांडों की उपलब्धता बढ़ाने और आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया गया है।

अवैध कारोबार रोकने के लिए सख्त प्रावधान
उत्पाद शुल्क चोरी रोकने के लिए सभी शराब उत्पादों पर विभाग द्वारा अनुमोदित सुरक्षा होलोग्राम लगाना अनिवार्य होगा। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्लास्टिक बोतलों में शराब की बिक्री पर रोक लगाई गई है। शराब केवल अनुमोदित कांच की बोतलों, पीईटी बोतलों और टिन कैन में ही बेची जा सकेगी।

राजस्व बढ़ाने के लिए शुल्क में संशोधन
नई नीति के तहत सभी भारत निर्मित विदेशी शराब ब्रांडों पर प्रति लीटर शुद्ध अल्कोहल (LPL) 500 रुपये का समान उत्पाद शुल्क निर्धारित किया गया है। थोक लाइसेंस का वार्षिक शुल्क 3.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है।
खुदरा दुकानों के लिए लेह नगर क्षेत्र में आधार मूल्य 60 लाख रुपये और अन्य क्षेत्रों में 30 लाख रुपये निर्धारित किया गया है। वहीं खुदरा विक्रेताओं का लाभ मार्जिन 12 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया है।

होटलों के लिए लाइसेंस प्रक्रिया हुई आसान
पहले होटलों को शराब लाइसेंस प्राप्त करने के लिए पर्यटन विभाग में पंजीकरण कराना अनिवार्य था। अब जीएसटी पंजीकरण वाले होटल सीधे उत्पाद शुल्क लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे। जीएसटी में पंजीकृत न होने वाले होटलों के लिए पर्यटन पंजीकरण आवश्यक रहेगा।

उपभोक्ता संरक्षण और रोजगार पर भी जोर
नई नीति में अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक कीमत पर शराब बेचने वालों के खिलाफ लाइसेंस रद्द करने और जब्ती जैसी कठोर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। साथ ही लाइसेंसधारकों को 21 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को रोजगार देने की अनुमति दी गई है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है।

धार्मिक और संवेदनशील स्थलों से दूरी अनिवार्य
नई शराब दुकानों की स्थापना केवल उन स्थानों पर की जा सकेगी जो धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और सार्वजनिक उद्यानों से कम से कम 100 मीटर की निर्धारित दूरी के मानकों का पालन करते हों।

उपराज्यपाल प्रशासन का कहना है कि संशोधित उत्पाद शुल्क नीति का उद्देश्य पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना, अवैध शराब कारोबार पर रोक लगाना तथा जनता की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए एक संतुलित और व्यावहारिक व्यवस्था स्थापित करना है।

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