दैनिक खबरनामा। श्रीनगर, 10 जून: एनआईए अधिनियम के तहत नामित विशेष अदालत ने वर्ष 1996 के एक आतंकवाद संबंधी मामले में हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख मोहम्मद यूसुफ शाह उर्फ सैयद सलाहुद्दीन समेत चार आरोपियों के खिलाफ उद्घोषणा (प्रोक्लेमेशन) जारी की है। अदालत ने चारों आरोपियों को 14 जुलाई, 2026 तक या उससे पहले न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (टाडा/पोटा) एवं एनआईए अधिनियम के तहत नामित विशेष न्यायाधीश मंजीत राय ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के प्रावधानों के तहत यह आदेश जारी किया। अदालत ने माना कि आरोपी लंबे समय से फरार हैं और जानबूझकर गिरफ्तारी से बच रहे हैं।
जिन आरोपियों के खिलाफ उद्घोषणा जारी की गई है, उनमें सैयद सलाहुद्दीन के अलावा गुलाम नबी खान, शेर मोहम्मद और नासिर यूसुफ कादरी शामिल हैं। इनके खिलाफ पुलिस स्टेशन सीआईके (क्राइम इन्वेस्टिगेशन कश्मीर), श्रीनगर में दर्ज एफआईआर के तहत कार्रवाई की जा रही है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामला 5 अप्रैल 1996 को दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियां कथित रूप से कश्मीरी युवाओं को आतंकी संगठनों में शामिल होने तथा भारत के खिलाफ गतिविधियों के लिए सीमा पार प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित कर रही थीं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि सलाहुद्दीन ने भड़काऊ भाषणों के माध्यम से युवाओं को उकसाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि आरोपियों के खिलाफ 26 फरवरी, 2026 को गिरफ्तारी वारंट जारी किए जा चुके थे। पुलिस, फील्ड अधिकारियों, ग्राम प्रतिनिधियों और स्थानीय प्रशासन की रिपोर्ट में यह पाया गया कि आरोपी अपने ज्ञात पते पर उपलब्ध नहीं हैं और गिरफ्तारी से बचने के लिए छिपे हुए हैं।
रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों और रिपोर्टों की समीक्षा के बाद अदालत ने माना कि उद्घोषणा जारी करने के लिए आवश्यक कानूनी शर्तें पूरी हो चुकी हैं। इसके बाद न्यायालय ने चारों आरोपियों को 14 जुलाई तक पेश होने का अंतिम अवसर दिया।
कोर्ट ने जांच अधिकारी और पुलिस स्टेशन सीआईके, श्रीनगर के एसएचओ को कानून के अनुसार उद्घोषणा का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत उद्घोषणा को सार्वजनिक रूप से पढ़कर सुनाना, आरोपियों के आवासों और न्यायालय परिसर में चस्पा करना तथा उनके निवास क्षेत्रों में प्रसारित होने वाले समाचार पत्रों में प्रकाशित करना शामिल है। अदालत ने जांच एजेंसी को पूरी प्रक्रिया के बाद अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का भी निर्देश दिया है।