दैनिक खबरनामा । शिमला, 17 जून : हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने घर खरीदारों के हितों की रक्षा करते हुए शिमला के समीप मशोबरा स्थित ‘मशोबरा हिल्स’ आवासीय परियोजना के डेवलपर के खिलाफ बड़ा फैसला सुनाया है। रेरा ने परियोजना विकसित कर रही कंपनी मैसर्स राजदीप एंड कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को फ्लैट खरीदार द्वारा जमा कराई गई पूरी राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है।
रेरा के चेयरमैन आर.डी. धीमान और सदस्य विदुर मेहता की पीठ ने यह आदेश बिहार के पटना निवासी नमिता सिंह की शिकायत पर सुनाया। शिकायतकर्ता ने परियोजना में दो बेडरूम वाला फ्लैट बुक कराया था और बुकिंग राशि व निर्माण लागत के रूप में कुल 78.10 लाख रुपये का भुगतान किया था।
शिकायत के अनुसार, बिल्डर ने फ्लैट का कब्जा 30 दिसंबर 2024 तक सौंपने का आश्वासन दिया था। साथ ही निवेश पर 7 प्रतिशत वार्षिक सुनिश्चित रिटर्न देने का वादा भी किया गया था। हालांकि तय समय सीमा बीत जाने के बावजूद न तो फ्लैट का कब्जा दिया गया और न ही खरीदार को किसी प्रकार की राहत या मुआवजा प्रदान किया गया।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि डेवलपर ने बाद में एक नया समझौता पत्र तैयार कर फ्लैट सौंपने की तिथि 2027 तक बढ़ाने का प्रयास किया। रेरा ने इसे खरीदार की सहमति के बिना किया गया कदम मानते हुए अस्वीकार कर दिया।
अथॉरिटी ने अपने आदेश में कहा कि डेवलपर परियोजना की वास्तविक स्थिति के बारे में खरीदार को पारदर्शी जानकारी देने में विफल रहा और अपने वादों को पूरा नहीं कर सका। यह आचरण रेरा अधिनियम, 2016 के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि शिकायतकर्ता को बैंक ऋण की किस्तें चुकानी पड़ रही थीं, जिससे उसे आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।
रेरा ने कंपनी को निर्देश दिए हैं कि वह आदेश जारी होने की तिथि से 60 दिनों के भीतर खरीदार की पूरी जमा राशि 10.80 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करे। अथॉरिटी ने चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर रेरा अधिनियम की धारा 40 के तहत वसूली सहित अन्य कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।