दैनिक खबरनामा | 8 अगस्त | वॉशिंगटन: रूस पर आर्थिक शिकंजा कसने और यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी कमाई के प्रमुख स्रोतों को प्रभावित करने की दिशा में अमेरिका ने बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सीनेट ने रूस और उसके पेट्रोलियम उत्पादों के बड़े खरीदार देशों के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों वाले एक विधेयक को भारी बहुमत से पारित कर दिया। बिल के पक्ष में 86 सीनेटरों ने वोट किया, जबकि 11 ने इसका विरोध किया।
इस प्रस्ताव के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से बड़े पैमाने पर तेल और गैस खरीदने वाले देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। ऐसे में रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा आयात करने वाले भारत और चीन पर भी इसका संभावित प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
बिल का बदला गया नाम
विधेयक का नाम बदलकर ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ कर दिया गया है। प्रस्ताव का एक प्रमुख उद्देश्य रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाना और उसकी ऊर्जा आय को प्रभावित करना है।
प्रस्तावित प्रावधान के मुताबिक रूस के पेट्रोलियम उत्पादों के शीर्ष पांच खरीदार देशों से आने वाले सामान पर अमेरिकी राष्ट्रपति को भारी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। इसका सीधा असर उन देशों पर पड़ सकता है जो रूस से बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीद रहे हैं।
ईरान पर भी सख्ती का प्रावधान
विधेयक में सिर्फ रूस को निशाना नहीं बनाया गया है। इसमें ‘ईरान सैंक्शन एक्ट ऑफ 1996’ की अवधि को 2031 तक बढ़ानेका प्रस्ताव भी शामिल है। इसके तहत ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा सकेंगे।
इस कानून को रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने आगे बढ़ाया था।
ग्राहम की मौत के बाद फिर तेज हुई कोशिश
लिंडसे ग्राहम ने 11 जुलाई को कीव की यात्रा की थी, जिसके बाद उनकी अचानक मृत्यु हो गई। उनके निधन के बाद रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों के नेताओं ने विधेयक को आगे बढ़ाने के प्रयास तेज किए। इसे यूक्रेन के समर्थन और रूस के खिलाफ दबाव की दिशा में दिवंगत सीनेटर ग्राहम की विरासत से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
ग्राहम की बहन डार्लिन ग्राहम, जिन्हें उनके निधन के बाद उनकी सीनेट सीट पर नियुक्त किया गया, ने कहा कि प्रस्ताव रूस की अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाले प्रमुख देशों के सामने एक विकल्प खड़ा करता है—या तो वे अमेरिका के साथ व्यापार को प्राथमिकता दें या सस्ती रूसी ऊर्जा खरीदना जारी रखें।
पुतिन और रूसी ओलिगार्क्स पर भी कार्रवाई
विधेयक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, रूसी अधिकारियों, अरबपति उद्योगपतियों यानी ओलिगार्क्स और वित्तीय संस्थानों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने का प्रावधान भी शामिल है। इसका मकसद रूस की आर्थिक और वित्तीय व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बनाना है।
डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि कठोर प्रतिबंध और टैरिफ रूस के युद्ध से जुड़े लोगों पर दबाव बढ़ाने में मदद करेंगे। हालांकि, कुछ डेमोक्रेट सीनेटरों ने इस बात को लेकर चिंता जाहिर की है कि विधेयक राष्ट्रपति ट्रंप को टैरिफ लगाने के मामले में व्यापक नए अधिकार प्रदान कर सकता है।
अब प्रतिनिधि सभा की बारी
सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में जाएगा। प्रतिनिधि सभा की अगली बैठक 31 अगस्त को निर्धारित है। वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही यह प्रस्ताव कानून बनने की प्रक्रिया में आगे बढ़ पाएगा।
फिलहाल सीनेट की मंजूरी के बाद इस विधेयक ने रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों, खासकर भारत और चीन, को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संभावित व्यापारिक और कूटनीतिक प्रभावों की चर्चा तेज कर दी है।