दैनिक खबरनामा नई दिल्ली, 29 मई : भारतीय वायुसेना अपने प्रमुख लड़ाकू विमानों को नई तकनीकों से सुसज्जित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसके तहत ‘सुपर सुखोई’ नामक व्यापक आधुनिकीकरण अभियान शुरू किया जाएगा, जिसमें बड़ी संख्या में बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमानों को उन्नत क्षमताओं से लैस किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना पर लगभग 63 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
वायुसेना के बेड़े में शामिल इन विमानों ने पिछले दो दशकों में अहम भूमिका निभाई है। अब बदलते युद्ध परिदृश्य और आधुनिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इन्हें नई पीढ़ी की तकनीकों से सुसज्जित किया जाएगा, ताकि भविष्य के युद्धक्षेत्र में उनकी प्रभावशीलता और बढ़ सके।
लंबी दूरी तक निगरानी की क्षमता
आधुनिकीकरण के तहत विमानों में स्वदेशी विकसित अत्याधुनिक रडार प्रणाली लगाई जाएगी। इससे दुश्मन के विमानों और लक्ष्यों का लंबी दूरी से पता लगाया जा सकेगा। साथ ही, एक समय में कई लक्ष्यों पर नजर रखने और इलेक्ट्रॉनिक व्यवधानों से बचाव की क्षमता भी बढ़ेगी।
युद्ध प्रणाली होगी और अधिक सक्षम
नई इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मिशन नियंत्रण तकनीक और विभिन्न सेंसरों के समन्वय से विमान की युद्ध क्षमता में बड़ा सुधार होगा। रडार, अवरक्त संकेतों और इलेक्ट्रॉनिक सूचनाओं को एकीकृत कर पायलट को अधिक सटीक जानकारी मिल सकेगी।
अत्याधुनिक दिशा-निर्देशन व्यवस्था
विमानों में बहु-उपग्रह आधारित दिशा-निर्देशन प्रणाली जोड़ी जाएगी, जिससे किसी भी मौसम और परिस्थिति में सटीक मार्गदर्शन संभव हो सकेगा। इससे लंबी दूरी के अभियानों में भी संचालन क्षमता मजबूत होगी।
नए हथियारों से बढ़ेगी मारक क्षमता
आधुनिकीकरण के बाद इन विमानों में नई पीढ़ी की हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें तथा लंबी दूरी के सटीक हथियार लगाए जाएंगे। स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा, जिससे आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा।
रखरखाव होगा अधिक प्रभावी
नई डिजिटल तकनीकों की मदद से विमानों की तकनीकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। संभावित खराबी का पहले ही अनुमान लगने से रखरखाव आसान होगा और विमानों की उड़ान उपलब्धता में भी बढ़ोतरी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभियान के बाद भारतीय वायुसेना की रणनीतिक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा और ये लड़ाकू विमान आने वाले वर्षों में देश की हवाई सुरक्षा की रीढ़ बने रहेंगे।