कुरुक्षेत्र 7 जनवरी (दैनिक खबरनामा)भले ही सतलुज–यमुना लिंक (SYL) नहर को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच विवाद अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, लेकिन हरियाणा सरकार ने दक्षिणी हरियाणा और दिल्ली की जल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इस नहर को उपयोग में लाने की दिशा में एक ठोस और व्यावहारिक योजना तैयार कर ली है।सिंचाई विभाग के अनुसार, आवश्यकता पड़ने पर SYL नहर में नरवाना ब्रांच नहर और मारकंडा नदी का पानी भी छोड़ा जाएगा। इससे न केवल जल आपूर्ति में बढ़ोतरी होगी, बल्कि बरसात के मौसम में मारकंडा नदी से आने वाली बाढ़ के खतरे को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
दो नहरों से पहुंचेगा पानीविभाग ने योजना के तहत दक्षिणी हरियाणा की ओर प्रतिदिन लगभग 10 हजार क्यूसेक पानी पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। इसमें से करीब 6,500 क्यूसेक पानी SYL नहर के माध्यम से और 3,500 क्यूसेक पानी नरवाना ब्रांच नहर से भेजा जाएगा। इस योजना को सफल बनाने के लिए नहरों के बड़े पैमाने पर जीर्णोद्धार का कार्य प्रस्तावित है, ताकि वर्षों से जर्जर हो चुकी जल संरचनाओं की क्षमता को फिर से बहाल किया जा सके।
50 करोड़ रुपये से होगा कायाकल्पसूत्रों के अनुसार, कुरुक्षेत्र जिले की सीमा में करीब 35 किलोमीटर लंबी SYL नहर के जीर्णोद्धार और चौड़ीकरण का कार्य किया जाएगा, जिस पर लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। कई स्थानों पर नहर की चौड़ाई अपने मूल 25 फीट से घटकर 15 फीट रह गई है। इसके अलावा नहर की तलहटी में गाद जमने और झाड़ियों के उग आने से जल प्रवाह प्रभावित हो रहा है, जिसे साफ करने की योजना बनाई गई है।मुख्यमंत्री की अंतिम मंजूरी का इंतजारप्रदेश स्तरीय तकनीकी समिति इस परियोजना को पहले ही स्वीकृति दे चुकी है। अब केवल मुख्यमंत्री स्तर से अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है। सिंचाई विभाग का मानना है कि परियोजना के पूरा होने के बाद दक्षिणी हरियाणा में स्थायी और सुचारु जल आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी, जिससे पेयजल और सिंचाई दोनों जरूरतों को लाभ मिलेगा।